*जब थाने की सीमा छोटी पड़ गई, तो ट्रेन जांच करने पहुंच गए दो जवान!* *गांजा खुर्द-बुर्द प्रकरण में एसपी सख्त, जांच की जिम्मेदारी एएसपी को सौंपी*

 *जब थाने की सीमा छोटी पड़ गई, तो ट्रेन जांच करने पहुंच गए दो जवान!*



*गांजा खुर्द-बुर्द प्रकरण में एसपी सख्त, जांच की जिम्मेदारी एएसपी को सौंपी*



कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस: कहते हैं मेहनत की कोई सीमा नहीं होती, और अगर वर्दी में जज़्बा हो तो थाना क्षेत्र भी छोटा पड़ जाता है। रंगनाथ थाना के दो जांबाज़ पुलिस जवान ने यही कर दिखाया। थाना क्षेत्र से निकलकर सीधे जीआरपी और आरपीएफ के अधिकार क्षेत्र में घुसकर उन्होंने वो काम कर डाला, जो असल में जीआरपी और आरपीएफ की जिम्मेदारी थी—ट्रेनों की जांच।

बताया जाता है कि जब जीआरपी और आरपीएफ ट्रेन की जांच में असफल होकर अगली ट्रेन का इंतजार कर रही होती है, तब रंगनाथ थाना के ये जवान अपनी जिम्मेदारी खुद तय कर लेते हैं। न स्टेशन की सीमा, न अधिकार क्षेत्र की रेखा—सीधे ट्रेन में चढ़ो और जांच शुरू!

भट्ठा मोहल्ला क्षेत्र से किसी जागरूक नागरिक ने मोबाइल कैमरा ऑन कर दिया। वीडियो धुंधला है, लेकिन इतना साफ जरूर है कि जब ट्रेन मुड़वारा स्टेशन पर रुकती है, तो रंगनाथ थाना के यह बहादुर जवान जांच के लिए पहुंच जाते हैं। चेहरा साफ नहीं दिखता, पर कहानी पूरी समझ आ जाती है।

अब कहानी में ट्विस्ट यह है कि यही जवान फिलहाल गांजा खुर्द-बुर्द के मामले में संदिग्ध बताए जा रहे हैं। यानी जांचकर्ता की भूमिका निभाने वाले खुद जांच के घेरे में आ गए। मामला सामने आते ही पुलिस महकमे में भी हलचल मच गई।

हालांकि गांजा खुर्द बुर्द मामले में पुलिस अधीक्षक ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच का जिम्मा एएसपी को सौंपा है। 

लेकिन जवान की यह अतिरिक्त सक्रियता सवाल कर रही है कि “कर्तव्यनिष्ठा” थी या “कर्तव्य से इतर उत्सुकता”।

फिलहाल इतना तय है कि यह जवान पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बने हुए हैं। रंगनाथ थाना के इस जवान ने यह साबित कर दिया कि अगर चाह हो, तो थाना सीमा क्या, पूरा सिस्टम ही पार किया जा सकता है—बस मोबाइल कैमरा ऑन न हो!

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