*लल्लू भइया तलैया गहरीकरण के दौरान निकले कछुए, जानकारों ने कहा- 'जीवित जलस्रोत और शुद्ध पानी का बड़ा संकेत'*





*लल्लू भइया तलैया गहरीकरण के दौरान निकले कछुए, जानकारों ने कहा- 'जीवित जलस्रोत और शुद्ध पानी का बड़ा संकेत'*

कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस :शहर के ऐतिहासिक जलस्रोत को पुनर्जीवित करने के लिए चल रहे गहरीकरण अभियान के बीच एक बेहद सुखद और सकारात्मक खबर सामने आई है। शहर के मध्य स्थित लल्लू भइया तलैया में गहरीकरण और गाद निकालने के काम के दौरान कछुए दिखाई दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो तालाब के भीतर दो से तीन कछुए देखे गए हैं, जो गहरीकरण के लिए मशीनें चलने के बाद पानी और कीचड़ के बीच हलचल करते नजर आए।

जैसे ही तलैया में कछुए होने की बात सामने आई, यह खबर पूरे क्षेत्र में कौतूहल और चर्चा का विषय बन गई। स्थानीय लोग इसे तालाब के वजूद और पर्यावरण के लिहाज से बेहद शुभ मान रहे हैं।


*क्या कहते हैं पर्यावरण और भू-जल मामलों के जानकार?*

इस मामले में पर्यावरणविदों और जल संरक्षण के जानकारों का कहना है कि शहरी क्षेत्र के किसी तालाब में कछुओं का पाया जाना बेहद महत्वपूर्ण घटना है।

* *जीवित जलस्रोत का अकाट्य प्रमाण:* जानकारों के अनुसार, कछुए उसी जलस्रोत में लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं, जहां पानी का प्राकृतिक स्रोत सक्रिय हो और तालाब नीचे से पूरी तरह मृत न हुआ हो।

* *भविष्य के लिए शुभ संकेत*: यदि इस तलैया का वैज्ञानिक तरीके से गहरीकरण पूरा किया जाए, तो यह आने वाले समय में न सिर्फ पानी को सहेजने बल्कि भू-जल स्तर को सुधारने में भी मील का पत्थर साबित होगी।


*स्थानीय लोगों ने की संरक्षण की मांग*

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और ठेकेदार से मांग की है कि गहरीकरण के दौरान भारी मशीनों (जैसे पोकलेन या जेसीबी) के उपयोग में थोड़ी सावधानी बरती जाए, ताकि इन मूक जलचरों को कोई नुकसान न पहुंचे। साथ ही, तालाब से निकलने वाले इन कछुओं को सुरक्षित रूप से उसी जलाशय के गहरे हिस्से में या वन विभाग की देखरेख में संरक्षित किया जाए।

Post a Comment

Previous Post Next Post