शहीदों की स्मृति पर चला बुलडोजर, 63 साल पुराना ‘शहीद द्वार’ हुआ ध्वस्त; नागरिकों में रोष


 

शहीदों की स्मृति पर चला बुलडोजर, 63 साल पुराना ‘शहीद द्वार’ हुआ ध्वस्त; नागरिकों में रोष

कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस /आशीष चौधरी । नई बस्ती की पहचान और भारत-चीन युद्ध के वीर शहीदों की स्मृति का प्रतीक रहा ऐतिहासिक ‘शहीद द्वार’ अब केवल यादों में रह गया है। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान 63 वर्षों से खड़ा यह स्मारकनुमा प्रवेश द्वार जमींदोज कर दिया गया, जिसके बाद क्षेत्रवासियों में नाराजगी और आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि जिस धरोहर को संरक्षित किया जाना चाहिए था, उसे बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के ढहा दिया गया।

सूत्रों से जानकारी के अनुसार, वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में बलिदान देने वाले सैनिकों के सम्मान में नई बस्ती के नागरिकों ने जनसहयोग से वर्ष 1963 में इस ‘शहीद द्वार’ का निर्माण कराया था। बीते छह दशकों से अधिक समय तक यह द्वार क्षेत्र की पहचान और देशभक्ति का प्रतीक बना रहा। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, यह केवल एक प्रवेश द्वार नहीं बल्कि शहीदों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का जीवंत प्रतीक था।

क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि वर्षों तक प्रशासन ने इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और रखरखाव की ओर ध्यान नहीं दिया। समय के साथ जर्जर होते ढांचे की मरम्मत कराने के बजाय उसे नजरअंदाज किया जाता रहा। हाल ही में जब इसकी खराब स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर तस्वीरें और पोस्ट साझा की गईं, तब प्रशासन सक्रिय हुआ, लेकिन संरक्षण के बजाय सीधे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी गई।

इस बीच स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि बीती रात किसी रेत से भरे भारी वाहन ने द्वार को टक्कर मार दी थी, जिससे संरचना क्षतिग्रस्त हो गई थी। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। नागरिकों का कहना है कि यदि वाहन की टक्कर से नुकसान हुआ है तो क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर दोषी वाहन और चालक की पहचान की जानी चाहिए।

घटना के बाद क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और जिस स्थान पर ऐतिहासिक ‘शहीद द्वार’ स्थित था, वहीं पुनः एक भव्य स्मारक का निर्माण कराया जाए। लोगों का कहना है कि शहीदों की स्मृति से जुड़ी ऐसी धरोहरों को मिटाने के बजाय संरक्षित करना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

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