₹40 हजार से ₹1 लाख तक लाभ पहुंचाने के मामले में चार इंजीनियरों के नाम चर्चा में, महाधिवक्ता की राय लिए बिना कार्रवाई का आरोप
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस :नगर निगम कटनी में 19 कर्मचारियों से जुड़े एक मामले को लेकर अब प्रशासनिक प्रक्रिया और मूल अभिलेखों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जिन कर्मचारियों के मामले में करीब ₹40 हजार से बढ़ाकर ₹1 लाख तक का आर्थिक लाभ दिए जाने की कार्रवाई की गई, उनमें चार इंजीनियर भी शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि संबंधित प्रकरण की मूल फाइल में कार्रवाई से पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के महाधिवक्ता से राय लिए जाने का उल्लेख किया गया था। आरोप के अनुसार मूल फाइल में पवन श्रीवास्तव उपयंत्री, जेपी बघेल उपयंत्री, पांडे उपयंत्री, मिश्रा उपयंत्री तथा प्रभारी कार्यालय अधीक्षक नागेंद्र पटेल से संबंधित मामलों में महाधिवक्ता की राय प्राप्त करने के बाद ही आगे की कार्रवाई किए जाने की बात दर्ज थी।
मूल नोटशीट अलग कर दूसरी नोटशीट लगाने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि प्रभारी कार्यालय अधीक्षक नागेंद्र पटेल और डिप्टी कमिश्नर शैलेश गुप्ता की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि मूल फाइल से मूल नोटशीट को अलग कर उसकी जगह दूसरी नोटशीट लगाकर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने की कार्रवाई की गई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। यदि मूल फाइल और नोटशीट के साथ छेड़छाड़ अथवा उन्हें बदलने की बात जांच में सही पाई जाती है तो यह मामला केवल आर्थिक लाभ देने तक सीमित न रहकर शासकीय अभिलेखों की प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ सकता है।
महाधिवक्ता की राय क्यों नहीं ली गई?
मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि जब मूल फाइल में हाईकोर्ट के महाधिवक्ता की राय लेने का उल्लेख था, तो कथित तौर पर बिना राय लिए ही कार्रवाई किस आधार पर की गई?
यदि यह तथ्य सही है कि सक्षम स्तर से कानूनी राय लेने के निर्देश मौजूद थे, तो यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि बाद की कार्रवाई किस नियम, आदेश अथवा प्रशासनिक निर्णय के आधार पर की गई।
मूल फाइल कहां है?
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मूल फाइल के स्थापना शाखा में उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि मूल फाइल वर्तमान में कहां है और उसमें दर्ज मूल नोटशीट सहित सभी दस्तावेज किस स्थिति में हैं।
इस पूरे प्रकरण में मूल फाइल, पूर्व की नोटशीट और बाद में तैयार की गई नोटशीट का मिलान कराया जाना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीर
नगर निगम के 19 कर्मचारियों से जुड़े इस मामले में यदि निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि आर्थिक लाभ देने की प्रक्रिया किस आदेश के तहत हुई, मूल फाइल में क्या निर्देश दर्ज थे, महाधिवक्ता की राय लेने की आवश्यकता क्यों बताई गई थी और बाद में उस प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
अब सवाल यह है कि नगर निगम प्रशासन मूल फाइल को सार्वजनिक जांच के लिए प्रस्तुत करेगा या नहीं? साथ ही संबंधित अधिकारियों की भूमिका और नोटशीट में हुए बदलाव के आरोपों की जांच किस स्वतंत्र एजेंसी या सक्षम अधिकारी से कराई जाएगी, इस पर भी निगाहें टिकी

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