डामर की सड़कें उखड़ीं तो पेवर ब्लॉक से पैबंद, निगम की इंजीनियरिंग पर उठे सवाल


 


डामर की सड़कें उखड़ीं तो पेवर ब्लॉक से पैबंद, निगम की इंजीनियरिंग पर उठे सवाल

कटनी/आशीष चौधरी /न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस । शहर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर नगर निगम की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई डामर की सड़कें कुछ ही महीनों में उखड़ने लगीं तो उनकी मरम्मत के लिए डामर की जगह सीमेंट के पेवर ब्लॉक लगाकर गड्ढे भरने का काम किया जा रहा है। इसे लेकर शहर में निगम के इंजीनियरों की कार्यशैली और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

शहरवासियों का कहना है कि जिन सड़कों के निर्माण पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, वे एक-दो बारिश भी नहीं झेल पातीं। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि सड़कें छह माह से एक वर्ष के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और बाद में स्थायी समाधान के बजाय पेवर ब्लॉक लगाकर खानापूर्ति कर दी जाती है।

सबसे हैरानी की बात यह है कि यह स्थिति शहर की बाहरी सड़कों की नहीं, बल्कि कलेक्ट्रेट कार्यालय जैसे प्रमुख मार्गों की है। यहां कई स्थानों पर डामर की सड़क उखड़ने के बाद गड्ढों में सीमेंट के पेवर ब्लॉक लगाकर मरम्मत की जा रही है। लोगों का कहना है कि यह तकनीकी दृष्टि से भी सवालों के घेरे में है और इससे सड़क की मजबूती तथा टिकाऊपन प्रभावित होता है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ होता तो कुछ ही महीनों में सड़कें खराब नहीं होतीं। अब बार-बार मरम्मत पर खर्च होने वाले सरकारी धन के उपयोग और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

शहर में यह चर्चा भी है कि पूरे मामले में नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और जवाबदेही तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य सुनिश्चित हो सके। हालांकि, इन आरोपों पर नगर निगम का पक्ष सामने आना शेष है।





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