रिठी तहसील के बखलेता-बरजी सड़क बना भ्रष्टाचार का अड्डा.. पहली बारिश में उखड़ी करोड़ों की सड़क, PWD की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

 रिठी तहसील के बखलेता-बरजी सड़क बना भ्रष्टाचार का अड्डा..

पहली बारिश में उखड़ी करोड़ों की सड़क, PWD की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल




कटनी :मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कटनी जिले के मोहास, बखलेता और बरजी गांव को जोड़ने वाली लोक निर्माण विभाग (PWD) की नई बनी सड़क पहली ही बारिश में बिखर गई। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई यह सड़क अब विकास का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का सबूत बन चुकी है।


सड़क नहीं, भ्रष्टाचार की परतें बिछीं!


ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान ही कई गड़बड़ियां सामने आ गई थीं। घटिया सामग्री का उपयोग, अधूरा रोलरिंग, और बेहद पतली डामर परत—इन सबकी शिकायतें की गईं, लेकिन अधिकारी और ठेकेदारों की मिलीभगत से सबकुछ नजरअंदाज़ कर दिया गया।


हमने देखा था कि गिट्टी घटिया थी, रोलर सही से नहीं चला और डामर की परत बस दिखावे के लिए डाली गई।" — एक स्थानीय निवासी


PWD मापदंड ध्वस्त, सड़क भी ध्वस्त


PWD के तय मानकों के अनुसार सड़क निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाली लेयरिंग, समतलीकरण, रोलर मशीनिंग और टिकाऊ डामर का उपयोग अनिवार्य होता है। लेकिन यहां सबकुछ सिर्फ कागज़ों पर हुआ। जमीन पर जो बिछा, वो सिर्फ भ्रष्टाचार था।


बारिश में उधड़ी परत, उजागर हुआ सिस्टम का सच


पहली ही बारिश ने डामर बहा दिया, मिट्टी बह गई और सड़क की असलियत सामने आ गई। कीचड़ से लथपथ रास्ता, जलभराव से भरे गड्ढे और धसकती सड़कें—यह है उस निर्माण की सच्चाई, जिसे "मानक के अनुसार" बताया गया था।

कई जगह डामर बह चुका है, नीचे की मिट्टी निकल गई है, और अब सड़क पर सिर्फ धोखा बचा है।"

अधूरी पुलिया, ठहरी नाली, धसकती सड़कें


पूरे मार्ग में कई पुलिया आज भी अधूरी हैं। नालियों की व्यवस्था न होने से बरसात का पानी सड़क पर बह रहा है और मिट्टी धंस रही है। कई हिस्सों में तो सड़क पूरी तरह गायब हो गई है।


कंपनी हरियाणा की, भ्रष्टाचार लोकल

सूत्रों की मानें तो इस सड़क का निर्माण आई नाइन फ्रीयास (पंचकूला, हरियाणा) कर रही है और पुलियों का ठेका रीवा-सतना के ठेकेदारों को दिया गया है। करोड़ों की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में कागजों पर सब कुछ "मानक" के अनुसार है, लेकिन जमीन पर सिर्फ गड़बड़ी की परतें बिछीं हैं।


"अगर सब कुछ मानक के अनुसार है… तो सड़क क्यों बह गई?"

यह सवाल आज हर ग्रामीण पूछ रहा है। ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन न कोई जांच शुरू हुई, न कोई जिम्मेदार अब तक पकड़ा गया।

प्रशासनिक अधिकारियों का रवैया—“कौन जिम्मेदार है, हम नहीं जानते।”


आखिर कब तक टैक्स का पैसा गड्ढों में गिरेगा?

किसकी जेब में गया जनता का पैसा?

किसने दी घटिया सामग्री को मंजूरी?


*कौन होगा जवाबदेह?*

*क्या होगी निष्पक्ष जांच*


यदि इन सवालों का जवाब नहीं मिला, तो आने वाले समय में ऐसी सड़कें सिर्फ कागजों पर बनेंगी और ग्रामीण जनता सिर्फ कीचड़, गड्ढों और धोखे से जूझती रहेगी।

सड़कें अगर विकास का चेहरा हैं, तो यह चेहरा आज शर्म से झुका हुआ है।"भ्रष्टाचार की डामर अब बह चुकी है, अब ज़रूरत है ईमानदारी की सड़क बनाने की!"

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