*कोरोना काल के बाद सरपंच-सचिवों ने सरकारी खजाने में लगाई सेंध* *​31 जिलों की 576 पंचायतों ने 'संबल' के नाम पर डकारी करोड़ों की राशि; बिना टेंडर 69 करोड़ का भुगतान*



 कोरोना काल के बाद सरपंच-सचिवों ने सरकारी खजाने में लगाई सेंध

31 जिलों की 576 पंचायतों ने 'संबल' के नाम पर डकारी करोड़ों की राशि; बिना टेंडर 69 करोड़ का भुगतान

​भोपाल: स्थानीय निधि संपरीक्षा प्रकोष्ठ द्वारा विधानसभा में पेश की गई वर्ष 2021-22 की ऑडिट रिपोर्ट ने प्रदेश की पंचायत राज व्यवस्था में मचे भ्रष्टाचार की कलई खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना काल के दौरान मिले अतिरिक्त कार्यकाल का फायदा उठाकर सरपंचों और सचिवों ने नियमों को ताक पर रख सरकारी धन की जमकर बंदरबांट की।

*​अंत्येष्टि सहायता में फर्जीवाड़ा*

​हैरानी की बात यह है कि गरीबों की अंत्येष्टि के लिए मिलने वाली 'मुख्यमंत्री संबल योजना' को भी नहीं बख्शा गया। प्रदेश के 31 जिलों की 576 पंचायतों ने मृतकों के नाम पर 1 करोड़ 27 लाख 65 हजार रुपये का अवैध आहरण किया। सीहोर, उज्जैन, सागर और गुना जैसे जिलों में यह फर्जीवाड़ा सबसे अधिक पाया गया।

*​बिना टेंडर 69 करोड़ के 'वारे-न्यारे'*

​ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश की 4261 पंचायतों ने बिना किसी टेंडर या कोटेशन प्रक्रिया के 69.25 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। बड़ी बात यह है कि इन सामग्रियों की कोई 'स्टॉक एंट्री' भी रिकॉर्ड में नहीं मिली, जिससे सामग्री की खरीदी पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

*​गायब मिले 43 करोड़ के दस्तावेज*

​भ्रष्टाचार का आलम यह है कि 1137 पंचायतों ने 43.36 करोड़ रुपये के खर्च से संबंधित कोई भी दस्तावेज ऑडिट टीम को उपलब्ध नहीं कराए। वहीं, बिना मस्टर रोल के ही 20.99 करोड़ का भुगतान कर दिया गया।

*​इन जनपदों में भारी अनियमितता*

​रीठी (कटनी), सांची, विदिशा, चौरई और तामिया जैसे जनपदों में पीएम आवास, कन्यादान और स्वच्छ भारत मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में करीब 6 करोड़ रुपये का गबन उजागर हुआ है। इस खुलासे के बाद अब दोषी सरपंचों और सचिवों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

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