*शराब से सरकारी खजाना भरने की तैयारी: कटनी में ₹450 करोड़ का राजस्व लक्ष्य!*
कटनी | मध्य प्रदेश सरकार आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने खजाने को भरने का बड़ा मास्टरप्लान तैयार कर चुकी है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार नई आबकारी नीति के तहत कटनी जिले में शराब दुकानों के नवीनीकरण के लिए लाइसेंस फीस में 20 प्रतिशत की भारी वृद्धि की तैयारी है। यदि यह प्रस्ताव मुहरबंद होता है, तो अकेले कटनी जिले से सरकार को 450 करोड़ रुपये से अधिक का मोटा राजस्व प्राप्त होगा।
*राजस्व का गणित: 75 करोड़ का अतिरिक्त 'बोनस'*
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल (2025-26) में कटनी का शराब ठेका 378 करोड़ रुपये में रिन्यू हुआ था। इस बार 20% की बढ़ोतरी के साथ सरकार की झोली में सीधे 75 करोड़ रुपये अतिरिक्त आने की उम्मीद है।
*खास बात*: पिछले साल भी फीस में 24% की बढ़ोतरी की गई थी, जिससे साफ है कि सरकार शराब को राजस्व प्राप्ति का सबसे बड़ा और आसान जरिया मानकर चल रही है।
*खजाने के लिए बदले जा रहे 111 साल पुराने नियम*
प्रदेश के खजाने को और मजबूती देने के लिए सरकार 111 साल पुराने आबकारी नियमों में बदलाव करने जा रही है। इसके लिए तीन दिग्गज मंत्रियों (जगदीश देवड़ा, उदय प्रताप सिंह और संपत्तिया उइके) की एक विशेष समिति बनाई गई है। यह समिति राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अवैध शराब की बिक्री पर लगाम लगाने के लिए भी नीति तैयार कर रही है।
*जनता की जेब पर पड़ेगा बोझ*
एक तरफ जहाँ सरकार का खजाना भरेगा, वहीं दूसरी ओर इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ना तय है।
लाइसेंस फीस बढ़ने से शराब की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है।
ठेकेदारों का कहना है कि ऊँची फीस के कारण उनके लिए व्यवसाय करना चुनौतीपूर्ण होगा, जिसकी भरपाई कीमतों को बढ़ाकर ही की जाएगी।
*धार्मिक शहरों में पाबंदी, फिर भी रिकॉर्ड राजस्व का लक्ष्य*
दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने एक ओर 17 धार्मिक शहरों (जैसे उज्जैन, मैहर, चित्रकूट) में पूर्ण शराबबंदी कर 47 दुकानें बंद कर दी हैं, वहीं दूसरी ओर बचे हुए जिलों में लाइसेंस फीस बढ़ाकर राजस्व की इस कमी को पूरा करने की रणनीति अपनाई है।

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