चौराहों पर हेलमेट की सख्ती, ट्रांसपोर्ट के ओवरलोड वाहनों पर खामोशी—क्यों चुप है सिस्टम?


 चौराहों पर हेलमेट की सख्ती, ट्रांसपोर्ट के ओवरलोड वाहनों पर खामोशी—क्यों चुप है सिस्टम?



हेलमेट पर सख्ती, ओवरलोड पर चुप्पी—यातायात विभाग के दोहरे मापदंड



कटनी/आशीष चौधरी /न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस : जिले में यातायात व्यवस्था को लेकर एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक ओर चौराहे-चौराहे पर तैनात यातायात विभाग और पुलिसकर्मी दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने का पाठ पढ़ाते नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की सड़कों पर बेखौफ दौड़ते ओवरलोड ट्रांसपोर्ट वाहन उनकी नजरों से जैसे ओझल बने हुए हैं।


नगर के प्रमुख मार्गों और व्यस्त चौराहों पर अक्सर हेलमेट चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर चालानी कार्रवाई भी की जाती है, जो सड़क सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक है। लेकिन सवाल तब खड़ा होता है, जब यही सख्ती भारी वाहनों के मामले में दिखाई नहीं देती।


कटनी शहर की सड़कों पर दिन-रात दौड़ते ट्रांसपोर्ट के भारी वाहन, जिनमें से कई ओवरलोड होते हैं, न केवल यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं बल्कि आम लोगों की जान को भी जोखिम में डालते हैं। इन वाहनों की तेज रफ्तार और अत्यधिक भार कई बार दुर्घटनाओं का कारण बनता है, बावजूद इसके इनके खिलाफ कार्रवाई लगभग न के बराबर नजर आती है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस और संबंधित विभाग की नजरें इन ओवरलोड वाहनों पर शायद ही पड़ती हों। चर्चाओं का बाजार तो यहां तक गर्म है कि ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और जिम्मेदार विभाग के बीच किसी प्रकार की ‘सांठगांठ’ के चलते इन पर कार्रवाई से परहेज किया जाता है।


यातायात नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से आवश्यक है, फिर चाहे वह दोपहिया वाहन चालक हो या भारी ट्रांसपोर्ट वाहन। यदि एक वर्ग पर सख्ती और दूसरे पर नरमी बरती जाएगी, तो यह न केवल कानून की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करेगा बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रयासों को भी कमजोर करेगा।


अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कब जागता है और ओवरलोड वाहनों पर भी उतनी ही सख्ती दिखाता है, जितनी हेलमेट न पहनने वालों पर दिखाई जाती है




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