खाकी के कितने अमानवीय चेहरे?
कटनी /न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस : कानून और सुरक्षा का भरोसा दिलाने वाली खाकी वर्दी जब खुद सवालों के घेरे में आ जाए, तो यह केवल एक विभाग नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। कटनी जिले में बीते समय में सामने आई कुछ घटनाएं इसी चिंता को और गहरा करती हैं।
मानव अधिकारों की रक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाली पुलिस पर ही उनके उल्लंघन के आरोप लगना गंभीर विषय है। जिले के कई थानों से ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जिन्होंने खाकी के व्यवहार को कठघरे में खड़ा कर दिया।
कटनी जीआरपी थाना में बंद कमरे में हुई मारपीट की घटना ने इंसानियत को झकझोर दिया था। मामला इतना बढ़ा कि प्रदेश स्तर के विपक्षी नेताओं को कटनी पहुंचकर विरोध दर्ज कराना पड़ा। यह घटना लंबे समय तक चर्चा में रही और पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती रही।
इसी क्रम में कुछ माह पूर्व एक पूरे परिवार को, जिसमें छोटे बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं, बिना स्पष्ट कारण के महिला थाने में बंद किए जाने का मामला सामने आया। इस घटना ने संवेदनशीलता और कानून के दायरे में काम करने के दावों को चुनौती दी। न्याय की मांग को लेकर पत्रकारों को भी सड़कों पर उतरकर धरना देना पड़ा, जिसके बाद उच्च स्तर पर हस्तक्षेप हुआ और कार्रवाई की गई।
बड़वारा थाना का एक पुराना मामला भी लोगों के जेहन में आज तक ताजा है, जिसमें एक पीड़ित महिला ने जिला अस्पताल में बयान देते हुए आरोप लगाया था कि थाने में उसके और उसके परिवार के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। किसी तरह जान बचाकर अस्पताल पहुंची महिला ने न्याय की गुहार लगाई थी।
ताजा मामला बस स्टैंड पुलिस चौकी से जुड़ा है, जहां एक बुजुर्ग पूर्व सैनिक दंपति के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। आरोप है कि चौकी प्रभारी ने थप्पड़ तक मार दिया और मोबाइल में की गई रिकॉर्डिंग भी डिलीट करवाई गई। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई है।
इसके बाद 20 अप्रैल 2026 की घटना ने स्थिति को और गंभीर बना दिया, जब इंद्रा नगर में आई एक बारात पर पुलिस द्वारा कथित रूप से बल प्रयोग किया गया। इस घटना ने प्रदेश स्तर के समाचार पत्रों में सुर्खियां बटोरीं। हालांकि कार्रवाई के नाम पर कुछ पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या यह पर्याप्त है या केवल औपचारिकता? अक्सर देखा गया है कि कुछ समय बाद ऐसे कर्मियों की पुनः अन्य स्थानों पर पदस्थापना कर दी जाती है।
इन घटनाओं की श्रृंखला यह दर्शाती है कि पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और संवेदनशीलता की सख्त आवश्यकता है। कानून का पालन कराने वाली संस्था से अपेक्षा होती है कि वह स्वयं भी कानून और मानवाधिकारों का पूर्ण सम्मान करे।
जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई की जाए.
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