कटनी में विकास या कमीशनखोरी का खेल?
नगर निगम में “काम कम, ठेके ज्यादा” के आरोपों से गरमाई सियासत
कटनी। शहर में विकास कार्यों के नाम पर लगातार हो रहे भूमि पूजन और निर्माण कार्यों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। नगर पालिका निगम कटनी में सड़कों, नालियों और सीवर परियोजनाओं को लेकर जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की हालत जस की तस क्यों बनी हुई है।
नगर निगम द्वारा आए दिन लाखों रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन बड़े स्तर पर किया जाता है। फोटो सेशन, प्रचार और बड़े-बड़े दावों के बीच शहरवासियों को “विकास” का सपना दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आती है। कई क्षेत्रों में पहले से बनी नालियों को जेसीबी मशीनों से तोड़कर सफाई या चौड़ीकरण के नाम पर हटाया जाता है और फिर उसी स्थान पर नए निर्माण के लिए ठेके जारी किए जाते हैं।
इसी तरह शहर की कई सड़कों को पहले सीवर लाइन परियोजना के तहत खोदा गया, जिससे अच्छी-खासी सड़कें बर्बाद हो गईं। इसके बाद उन्हीं सड़कों के पुनर्निर्माण के नाम पर फिर से टेंडर जारी किए गए। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि इन कार्यों में कुछ “चहेते ठेकेदारों” को लाभ पहुंचाने का खेल लंबे समय से चल रहा है।
शहरवासियों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये वास्तव में गुणवत्ता पूर्ण विकास पर खर्च हुए होते, तो आज कटनी की सड़कें गड्ढों में तब्दील नहीं होतीं और न ही नालियों की स्थिति इतनी बदहाल दिखाई देती। बारिश के मौसम में जलभराव और टूटी सड़कों की समस्या हर वर्ष लोगों की परेशानी बढ़ाती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों की योजना से अधिक महत्व कमीशन व्यवस्था को दिया जा रहा है। यही कारण है कि एक ही कार्य बार-बार कराया जाता है, जबकि स्थायी समाधान दिखाई नहीं देता। वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी शहर की आधारभूत सुविधाओं की स्थिति सवालों के घेरे में बनी हुई है।
अब शहर में यह चर्चा आम हो चली है कि आखिर कटनी में “वास्तविक विकास” हो रहा है या फिर विकास कार्यों की आड़ में कमीशनखोरी और ठेकेदारी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। जनता जवाब चाहती है कि यदि इतना धन खर्च हुआ है, तो उसका लाभ जमीन पर आखिर दिखाई क्यों नहीं देता।
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