खाली बस्तों में छिपा बड़ा सवाल: “सर, हमारा स्कूल आखिर कब बनेगा?” मंगलवार जिला जनसुनवाई मे शिक्षा मंत्री के नाम सौपा ज्ञापन

 

खाली बस्तों में छिपा बड़ा सवाल: “सर, हमारा स्कूल आखिर कब बनेगा?”



मंगलवार जिला जनसुनवाई मे शिक्षा मंत्री के नाम सौपा ज्ञापन

 

कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस :सरकारी योजनाओं के पोस्टरों पर “हर बच्चा पढ़े” और “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” के नारे भले चमक रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत मंगलवार को जिला जनसुनवाई में उस वक्त खुलकर सामने आ गई, जब स्लीमनाबाद तहसील के ग्राम चरगवा से आए मासूम बच्चे अपने कंधों पर खाली बस्ते टांगकर प्रशासन के सामने खड़े हो गए।

बच्चों की आंखों में उम्मीद थी और होंठों पर एक सीधा सवाल—
“सर, हमें हमारा स्कूल कब मिलेगा?”

जनसुनवाई कक्ष में मौजूद अधिकारी, अभिभावक और अन्य लोग उस पल कुछ देर के लिए खामोश हो गए। यह सिर्फ एक मांग नहीं थी, बल्कि ग्रामीण अंचल के उन बच्चों की पीड़ा थी, जिनके सपनों और शिक्षा के बीच दूरी सबसे बड़ी दीवार बन चुकी है।

8 किलोमीटर की दूरी ने छीने पढ़ाई के सपने

ग्रामीणों ने बताया कि चरगवा क्षेत्र कई गांवों का केंद्र है। यहां पाली, पूरा, पहरुआ और सल्हना जैसे गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं। गांव में केवल माध्यमिक विद्यालय यानी कक्षा 8वीं तक की व्यवस्था है। इसके बाद 9वीं और 10वीं की पढ़ाई के लिए बच्चों को रोजाना करीब 8 किलोमीटर दूर घुघर, देवरी या कोडियां जाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि परिवहन सुविधाओं के अभाव और आर्थिक तंगी के कारण अधिकांश परिवार अपने बच्चों को आगे नहीं पढ़ा पाते। सबसे ज्यादा असर बेटियों की शिक्षा पर पड़ रहा है। लंबी दूरी और सुरक्षा की चिंता के चलते कई छात्राएं बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रही हैं।

खाली बैग सौंपकर जताया विरोध

जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों और छात्रों ने शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। बच्चों ने अपने खाली स्कूल बैग प्रशासन के सामने रख दिए। उनका कहना था कि जब गांव में हाई स्कूल ही नहीं है, तो ये बस्ते आखिर किस काम के?

ग्रामीणों ने मांग की कि ग्राम चरगवा में तत्काल शासकीय हाई स्कूल स्वीकृत किया जाए और आगामी शैक्षणिक सत्र से ही कक्षा 9वीं और 10वीं की पढ़ाई शुरू कराई जाए। साथ ही स्कूल भवन, शिक्षकों की नियुक्ति, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।

“बच्चों का भविष्य व्यवस्था की अनदेखी का शिकार”

ग्रामीणों ने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का संवैधानिक अधिकार है। यदि केवल संसाधनों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे पढ़ाई से वंचित रह जाएं, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी। उन्होंने शासन से संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द निर्णय लेने की मांग की।

सैकड़ों ग्रामीण हुए शामिल

ज्ञापन सौंपने और प्रदर्शन के दौरान एडवोकेट अनिल सिंह सेंगर, सुशील सिंह, धर्मेंद्र सिंह राणा, अर्जुन कुशवाहा, सुखदेव यादव, रवि पाल और मिलन कुशवाह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण, अभिभावक और छात्र मौजूद रहे।

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