JPV DAV स्कूल पर निगम का शिकंजा: 62 हजार का जुर्माना, 3 दिन की मोहलत—वरना तालाबंदी तय!
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस /आशीष चौधरी :शहर की शैक्षणिक साख पर उस वक्त सवाल खड़े हो गए, जब प्रतिष्ठित JPV DAV स्कूल में हुई आगजनी की घटना ने व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी। किताबों और अनुशासन की बात करने वाला यह संस्थान खुद सुरक्षा के बुनियादी पाठ में फेल नजर आया। अब नगर निगम ने सख्त तेवर दिखाते हुए स्कूल प्रबंधन को आईना दिखा दिया है।
निगम प्रशासन ने फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर सीधा प्रहार करते हुए 61,500 रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। साथ ही, तीन दिन का अल्टीमेटम जारी कर स्पष्ट कर दिया गया है—या तो कमियां सुधरेंगी, या स्कूल के गेट पर ताला लटकेगा।
निरीक्षण में खुली लापरवाही की परतें
नगर निगम के निरीक्षण में सामने आया कि स्कूल में फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट का अभाव है और सुरक्षा उपकरण भी अधूरे या अनुपयोगी हालत में हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रबंधन ने पहले समय मांगकर खुद ही अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की थी, लेकिन तय समय गुजरने के बाद भी न सुधार हुआ, न कोई रिपोर्ट सौंपी गई। यही ढिलाई अब भारी पड़ी।
निगम का सख्त संदेश—अब नहीं चलेगी लापरवाही
निगम ने साफ निर्देश दिए हैं:
- 61,500 रुपये की राशि तत्काल जमा की जाए।
- तीन दिन के भीतर सभी अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा कर फायर ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
- आदेश की अवहेलना पर सीधे तालाबंदी (सीलिंग) की कार्रवाई की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल—शिक्षा विभाग आखिर खामोश क्यों?
इस पूरे मामले में नगर निगम की सक्रियता तो दिख रही है, लेकिन शिक्षा विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा इतना गंभीर मामला होने के बावजूद विभागीय कार्रवाई का अभाव चिंताजनक है।
क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? या फिर नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं?
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी और जवाबदेही का आईना है। अगर समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो लापरवाही की ये चिंगारी कभी भी बड़ी आग में बदल सकती है—और तब सवालों का धुआं संभालना मुश्किल होगा।

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