11 साल पहले दिवंगत शिक्षक आज भी ‘ड्यूटी पर’, शिक्षा विभाग के पोर्टल ने खोली डिजिटल व्यवस्था की पोल
मृत शिक्षक की पदस्थापना दिखने से जीवित शिक्षक अतिशेष सूची में पहुंचे, शिकायतों के बाद भी नहीं सुधरी त्रुटि
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस /आशीष चौधरी । सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार शिक्षा विभाग के डिजिटल रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। जनपद शिक्षा केंद्र ढीमरखेड़ा के अंतर्गत ऐसा मामला उजागर हुआ है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। वर्ष 2015 में दिवंगत हो चुके एक शिक्षक का नाम आज भी एजुकेशन पोर्टल 3.0 में सक्रिय शिक्षक के रूप में दर्ज है और उनकी पदस्थापना शासकीय प्राथमिक शाला मंगेली में प्रदर्शित की जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि जिस शिक्षक का निधन एक दशक पहले हो चुका है, वह सरकारी रिकॉर्ड में अब भी सेवा दे रहे हैं, जबकि इस तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा वर्तमान में कार्यरत शिक्षक को भुगतना पड़ रहा है। पोर्टल में दर्ज गलत जानकारी के कारण शासकीय कन्या उमावि उमरियापान के प्रभारी सूर्यकांत त्रिपाठी का नाम अतिशेष शिक्षकों की सूची में शामिल हो गया है, जिससे उनके स्थानांतरण और सेवा संबंधी अधिकार प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।
जानकारी के अनुसार, दिवंगत शिक्षक महिपाल सिंह ठाकुर पूर्व में शासकीय प्राथमिक शाला दैगवां में पदस्थ थे और वर्ष 2015 में उनका निधन हो गया था। इसके बावजूद अप्रैल 2026 से एजुकेशन पोर्टल 3.0 में उनका नाम प्राथमिक शाला मंगेली में पदस्थ शिक्षक के रूप में दर्ज दिखाई दे रहा है। यह स्थिति केवल एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि विभागीय निगरानी और डेटा सत्यापन प्रणाली की विफलता को भी उजागर करती है।
प्रभारी सूर्यकांत त्रिपाठी ने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर इस त्रुटि को तत्काल सुधारने की मांग की है। उनका कहना है कि एजुकेशन पोर्टल, विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय ढीमरखेड़ा और संकुल केंद्र उमरियापान के माध्यम से कई बार शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप गलत रिकॉर्ड आज भी जस का तस बना हुआ है।
यह मामला सवाल खड़ा करता है कि जब विभाग अपने कर्मचारियों के मूलभूत सेवा रिकॉर्ड तक सही नहीं रख पा रहा है, तो डिजिटल शासन और ऑनलाइन प्रबंधन के दावों पर कितना भरोसा किया जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मृतक कर्मचारी वर्षों बाद भी सरकारी पोर्टल पर सक्रिय दिखाई दें और जिम्मेदार अधिकारी इसे सुधारने में असफल रहें, तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का भी उदाहरण है।
अब निगाहें जिला शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि वह इस स्पष्ट गलती को कितनी जल्दी सुधारता है और भविष्य में ऐसी लापरवाहियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

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