74 सफाई कर्मचारियों की आईडी बंद, लेकिन सवालों के घेरे में पूरी व्यवस्था
एक दिन की छुट्टी वालों पर भी कार्रवाई, निगम प्रशासन की चुप्पी से बढ़े सवाल
कटनी | न्यूज़ एमपी एक्सप्रेस/आशीष चौधरी
कटनी नगर निगम में 74 सफाई कर्मचारियों की आईडी अचानक बंद किए जाने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। हैरानी की बात यह है कि जिन कर्मचारियों की आईडी बंद की गई, उनमें लगभग 15 ऐसे कर्मचारी भी बताए जा रहे हैं जो संबंधित दिन अवकाश पर थे। इस कार्रवाई को लेकर न तो निगम प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक सूचना जारी की गई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों का कोई स्पष्ट बयान सामने आया है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर निगम में लंबे समय से आउटसोर्स कर्मचारियों की उपस्थिति और भुगतान व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आरोप हैं कि कुछ कर्मचारी केवल हाजिरी दर्ज कराकर चले जाते हैं, जबकि उनके नाम पर नियमित रूप से वेतन का भुगतान होता रहता है। यह व्यवस्था वर्षों से चल रही है और इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों तक होने की भी चर्चा है।
नगर निगम में वर्तमान में लगभग 500 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत बताए जाते हैं। इनमें से कई कर्मचारियों के संबंध में यह आरोप सामने आते रहे हैं कि वे नियमित रूप से कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं होते, फिर भी उनके नाम पर वेतन आहरित होता है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो कई जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
जानकारों के अनुसार हाल ही में निगम आयुक्त द्वारा कथित रूप से अनियमित पाए गए कर्मचारियों की आईडी लॉक करने की कार्रवाई की गई है। इसे फर्जी हाजिरी और वेतन भुगतान पर अंकुश लगाने की कोशिश माना जा रहा है। हालांकि दूसरी ओर कर्मचारियों का कहना है कि बिना स्पष्ट जांच और सूचना के आईडी बंद करना उचित नहीं है, विशेषकर उन लोगों के मामले में जो अवकाश पर थे या नियमित रूप से कार्य कर रहे थे।
पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि वास्तव में वर्षों से फर्जी हाजिरी और भुगतान का खेल चल रहा था तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त है या फिर उन अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी जिनकी निगरानी में यह व्यवस्था संचालित होती रही?
फिलहाल नगर निगम प्रशासन की ओर से कोई अधिकृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में 74 आईडी बंद होने की कार्रवाई जहां भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की आशंकाओं को बल दे रही है, वहीं निर्दोष कर्मचारियों के प्रभावित होने की संभावना को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निगम प्रशासन पूरे मामले में पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाता है या नहीं।
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