ग्राम पंचायत बाकल में नाली निर्माण पर भ्रष्टाचार के आरोप, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
करोड़ों की लागत वाले निर्माण कार्य की तकनीकी जांच की मांग, विधायक-सरपंच की चुप्पी पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस /आशीष चौधरी
:- कटनी जिले की बहोरीबंद जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बाकल में चल रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण करोड़ों रुपये की लागत से किए जा रहे इस विकास कार्य की उपयोगिता और टिकाऊपन पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले ने अब स्थानीय स्तर से निकलकर व्यापक चर्चा का रूप ले लिया है और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष तकनीकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में शुक्ला कालोनी से बाजार बस्ती तक सड़क का निर्माण हो रहा है साथ ही नाली का निर्माण भी कराया जाना तय हुआ है जिसमें लगभग 800 मीटर लंबी नाली का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण के दौरान नाली के भीतर बड़े-बड़े पत्थर, निर्माण मलबा तथा आरसीसी सीमेंट पाइप डाले जा रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रकार का निर्माण न केवल तकनीकी दृष्टि से संदिग्ध है बल्कि भविष्य में जल निकासी व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि नाली निर्माण में आरसीसी पाइप डालने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है और यदि इस प्रकार का निर्माण किया गया तो नाली के जाम होने की संभावना बढ़ जाएगी।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटो और वीडियो
निर्माण कार्य से जुड़े फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो और तस्वीरों में नाली के भीतर मलबा और बड़े पत्थर दिखाई देने के दावे किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामग्री सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है और लोग निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि वायरल वीडियो और तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इन दावों ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
तकनीकी निगरानी के अभाव का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर न तो कोई प्रशिक्षित मिस्त्री नियमित रूप से दिखाई देता है और न ही किसी तकनीकी अधिकारी या इंजीनियर की प्रभावी निगरानी नजर आती है। आरोप है कि निर्माण कार्य स्थानीय अप्रशिक्षित मजदूरों के माध्यम से कराया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं हुआ तो कुछ वर्षों में ही नाली क्षतिग्रस्त हो सकती है।
भविष्य में जलभराव की आशंका
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नाली के भीतर मलबा और बड़े पत्थर भरकर निर्माण किया गया है तो भविष्य में उसकी सफाई करना अत्यंत कठिन होगा। इससे जल निकासी बाधित होने की संभावना बढ़ जाएगी। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि बरसात के दौरान नालियां जाम होने पर गांव के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित होगा।
पहले भी उठ चुके हैं विकास कार्यों पर सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में पूर्व में हुए कुछ निर्माण कार्यों, विशेष रूप से सड़क निर्माण को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। उस समय भी लोगों ने गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी चर्चा का विषय
मामले को लेकर स्थानीय विधायक और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आने पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि जनहित से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मामले पर जनप्रतिनिधियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि शिकायतें सही हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।
पीडब्ल्यूडी विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) की देखरेख में नाली और सड़क निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों की निगरानी प्रभावी नहीं दिखाई दे रही है। आरोप यह भी है कि मूल ठेकेदार द्वारा कार्य पेटी ठेकेदार को दिया गया और बाद में स्थानीय स्तर पर अप्रशिक्षित श्रमिकों के माध्यम से निर्माण कराया जा रहा है, जिससे मनमानी और तकनीकी अनियमितताओं की आशंका बढ़ गई है।
निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत बहोरीबंद, लोक निर्माण विभाग तथा संबंधित उच्च अधिकारियों से पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष और स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, तकनीकी स्वीकृति और कार्यप्रणाली की विशेषज्ञों से जांच कराई जानी चाहिए। यदि जांच में अनियमितता या गुणवत्ता में कमी की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं और जनता को इन कार्यों से दीर्घकालिक लाभ मिलना चाहिए। ऐसे में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन और संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। फिलहाल पूरे मामले को लेकर ग्राम पंचायत बाकल में चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासनिक हस्तक्षेप तथा जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

Post a Comment