नगर निगम के बाहर कर्मचारियों का चक्का जाम, आरोपी की गिरफ्तारी की मांग पर सड़क बनी विरोध का मंच
बिना अनुमति मुख्य मार्ग अवरुद्ध करने पर उठे सवाल, निगम आयुक्त की मौन सहमति को लेकर भी चर्चा
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस /आशीष चौधरी । नगर निगम के अतिक्रमण विभाग के कर्मचारियों के साथ हुई मारपीट के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार को नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों ने निगम कार्यालय के बाहर मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। करीब आधे घंटे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान सड़क पर अतिक्रमण शाखा के वाहन और बांस-बल्लियां लगाकर आवागमन रोक दिया गया, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पूर्व अतिक्रमण विभाग कार्यालय में कर्मचारियों के साथ मारपीट की घटना हुई थी। इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से नाराज कर्मचारियों और अधिकारियों ने सामूहिक रूप से सड़क पर उतरकर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान निगम कार्यालय में आयुक्त की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। शहर में इस बात को लेकर सवाल उठते रहे कि क्या इस विरोध प्रदर्शन को प्रशासनिक स्तर पर मौन सहमति प्राप्त थी।
नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर कोतवाली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया था। निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने पर कर्मचारियों और अधिकारियों ने चक्का जाम का निर्णय लिया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कोतवाली थाना पुलिस भी मौके पर मौजूद रही, लेकिन सड़क खाली कराने या यातायात सामान्य करने के बजाय पुलिसकर्मी छाया में खड़े होकर स्थिति का अवलोकन करते नजर आए। इससे लोगों के बीच पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे।
चक्का जाम के कारण राहगीरों, वाहन चालकों और स्थानीय नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। इसी दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति ने सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध किए जाने पर आपत्ति जताई और इसे गलत बताते हुए विरोध दर्ज कराया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसके बाद कुछ कर्मचारी और अधिकारी वहां पहुंच गए और बुजुर्ग को वहां से हटने के लिए कहने लगे। यह पूरा घटनाक्रम पुलिस की मौजूदगी में हुआ।
घटना के बाद शहर में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि यदि किसी आम संगठन या नागरिक द्वारा बिना अनुमति मुख्य मार्ग पर चक्का जाम किया जाता तो प्रशासन और पुलिस की क्या कार्रवाई होती। वहीं निगम कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक रवैये को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल कर्मचारियों की मांग है कि मारपीट के मामले में आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की जाए, जबकि नागरिकों का कहना है कि विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके लिए आमजन को परेशानी में डालना उचित नहीं माना जा सकता।
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