उम्मीद की डोर थामे जनसुनवाई पहुंच रहे फरियादी, लेकिन समाधान का इंतजार बरकरार
तीन मंगलवार बीत गए, फिर भी नहीं सुलझी वृद्ध की समस्या
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस :जिले में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण करना है, लेकिन कई मामलों में यह व्यवस्था केवल औपचारिकता तक सीमित होती दिखाई दे रही है। दूर-दराज के गांवों से लोग अपनी शिकायतों के समाधान की उम्मीद लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचते हैं, परंतु कई फरियादियों को बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी राहत नहीं मिल पाती।
जनसुनवाई में पहुंचे एक वृद्ध की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। मीडिया प्रतिनिधि द्वारा समस्या के बारे में पूछे जाने पर वृद्ध ने कहा कि वह लगातार तीसरे मंगलवार अपनी शिकायत लेकर जनसुनवाई में आए हैं। उन्होंने बताया कि इस बार अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी समस्या का समाधान कर दिया जाएगा, इसलिए वह अधिक कुछ बताना नहीं चाहते। वृद्ध ने यह भी कहा कि कहीं उनकी बात सार्वजनिक होने से अधिकारी नाराज न हो जाएं।
जनसुनवाई समाप्त होने के बाद वही वृद्ध कलेक्ट्रेट परिसर में फर्श पर बैठकर घर से लाया भोजन करते दिखाई दिए। यह दृश्य उन सैकड़ों लोगों की पीड़ा को दर्शाता है जो अपनी अलग-अलग समस्याओं के समाधान की उम्मीद में हर मंगलवार कलेक्ट्रेट का रुख करते हैं।
जानकारों का कहना है कि कई शिकायतकर्ताओं को अपनी समस्या के निराकरण के लिए चार से सात बार तक जनसुनवाई में आना पड़ता है। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा समयबद्ध कार्रवाई नहीं होने से लोगों में निराशा बढ़ रही है।
हर मंगलवार को प्रशासन की ओर से 150 से 200 शिकायतें प्राप्त होने के आंकड़े जारी किए जाते हैं और जनसुनवाई की तस्वीरें भी सामने आती हैं, लेकिन इन शिकायतों में से कितनों का वास्तविक समाधान हुआ, इसका कोई सार्वजनिक विवरण उपलब्ध नहीं कराया जाता। आरोप यह भी हैं कि कई मामलों में अधिकारियों द्वारा केवल दिशा-निर्देश देकर जिम्मेदारी आगे बढ़ा दी जाती है, जबकि शिकायतकर्ता समाधान की प्रतीक्षा में भटकते रहते हैं।
जनसुनवाई व्यवस्था की सफलता केवल शिकायतें प्राप्त करने में नहीं, बल्कि उनके प्रभावी और समयबद्ध निराकरण में निहित है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि प्रशासन प्राप्त शिकायतों के साथ-साथ उनके निस्तारण की स्थिति भी सार्वजनिक करे, ताकि आम जनता का विश्वास इस व्यवस्था में बना रहे।

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