*नहर निर्माण की आड़ में अवैध उत्खनन का आरोप, डबरा वाली खेर माई एवं डबरा टोरिया को बचाने ग्रामीण पहुंचे सांसद के दरबार*


 


 *नहर निर्माण की आड़ में अवैध उत्खनन का आरोप, डबरा वाली खेर माई एवं डबरा टोरिया को बचाने ग्रामीण पहुंचे सांसद के दरबार*

जबलपुर /न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस /आशीष चौधरी :ग्राम पंचायत देवनगर के ग्राम पथरई एवं सहजपुरा के बीच स्थित आस्था, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े प्राचीन धार्मिक स्थल डबरा वाली खेर माई मंदिर एवं डबरा टोरिया क्षेत्र को संभावित खनन गतिविधियों से बचाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सांसद आशीष दुबे को ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में नहर निर्माण की आड़ में खनन माफियाओं द्वारा अवैध उत्खनन की कोशिशें की जा रही थीं, जिसकी जानकारी ग्रामीणों ने समय रहते प्रशासन को दी। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर पहले एसडीएम, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया गया था, जिसके बाद खनन गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई हुई। अब ग्रामीण स्थायी रोक की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार डबरा टोरिया क्षेत्र केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि यह क्षेत्र पशुओं के लिए चारा, प्राकृतिक जल स्रोत और स्थानीय पर्यावरण संरक्षण का भी प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित डबरा वाली खेर माई मंदिर से हजारों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि खनन को अनुमति दी गई तो धार्मिक स्थल, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया कि खसरा नंबर 576 को वर्ष 2016 में आबादी क्षेत्र घोषित किए जाने की प्रक्रिया हुई थी, लेकिन आज तक इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की खनन प्रक्रिया पर पूर्ण रोक लगाई जाए।

सांसद आशीष दुबे ने ग्रामीणों की बात सुनते हुए संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर उचित कार्रवाई एवं शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं, धार्मिक आस्था और पर्यावरण से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने वालों में रुपेश नायक, शैलेंद्र पांडे, वकील यादव, रामकुमार नायक, गुड्डू भूमिया, अजय भूमिया, धीरज चौधरी, अनु यादव, किशन लाल यादव, अनिल पांडे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीणों की चेतावनी:

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि भविष्य में फिर से खनन गतिविधियां शुरू करने का प्रयास किया गया तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे और जिला प्रशासन व मध्यप्रदेश सरकार से जवाब मांगेंगे

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