*वसूली कांड में नया मोड़: 25 हजार के आरोप से मुकरा शिकायतकर्ता, कहा– "ड्राइवर ने दी थी झूठी जानकारी"; महकमे में उठे सवाल: दबाव या समझौता?*


*वसूली कांड में नया मोड़: 25 हजार के आरोप से मुकरा शिकायतकर्ता, कहा– "ड्राइवर ने दी थी झूठी जानकारी"; महकमे में उठे सवाल: दबाव या समझौता?*

कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस


। सीएसपी (CSP) और उनके चालक पर 25 हजार रुपये की वसूली के सनसनीखेज आरोपों के बाद महकमे में हलचल मची ही थी कि इस पूरे मामले में एक बड़ा यू-टर्न आ गया है। शिकायतकर्ता ट्रांसपोर्ट व्यवसायी महेंद्र जैन ने एसपी को दोबारा आवेदन सौंपकर अपनी शिकायत वापस ले ली है। 25 जुलाई को सौंपे गए पत्र में व्यवसायी ने दावा किया है कि उनके चालक ने जो जानकारी दी थी, वह "असत्य, भ्रामक और आधारहीन" थी।

हालांकि, शिकायत के सार्वजनिक होने, चालक के सस्पेंड होने और सीएसपी के अधिकार क्षेत्र (थानों का प्रभार) सीमित किए जाने के ठीक बाद अचानक शिकायत वापसी के इस घटनाक्रम ने शहर में नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सब बिना किसी 'अदृश्य दबाव' या 'परदे के पीछे हुए समझौते' के संभव हुआ है?


*पत्र में क्या लिखा है शिकायतकर्ता ने?*

एसपी अभिनय विश्वकर्मा को दिए गए वापसी आवेदन में महेंद्र जैन (48 वर्ष) निवासी साईं अपार्टमेंट, गल्लामंडी ने लिखा है कि 22 जुलाई 2026 को उन्होंने सीएसपी और उनके ड्राइवर केशव सिंह के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया:

* "उक्त आवेदन में मेरे द्वारा सी.एस.पी. मैडम एवं उनके ड्राइवर के विरुद्ध अपने ड्राइवर के बताये अनुसार लेखबद्ध शिकायत की थी। किन्तु जब मेरे द्वारा उक्त घटना के बारे में विस्तृत जाँच की गई तब मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि मेरे ड्राइवर ने घटना से सम्बंधित जो जानकारियाँ मुझे दी थीं... वह समस्त जानकारियाँ असत्य, भ्रामक एवं आधारहीन थीं।"

व्यवसायी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे इस आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं चाहते और बिना किसी भय या दबाव के, स्वेच्छा से अपनी शिकायत वापस ले रहे हैं।


*खबर के बड़े सवाल: क्या दबाव बना या फिर हुआ कोई 'समझौता'?*

भले ही आवेदन में "बिना किसी भय और दबाव" की बात लिखी गई हो, लेकिन 22 जुलाई को दर्ज कराई गई गंभीर शिकायत और 25 जुलाई को अचानक हुए इस यू-टर्न को लेकर कई तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं:

* *क्या वाकई ड्राइवर की बात झूठी थी?* जिस रात की यह घटना बताई जा रही है, क्या एक आम ट्रांसपोर्टर बिना पुख्ता वजह के सीधे सीएसपी स्तर के अधिकारी पर गंभीर आरोप लगा देगा?

* *प्रशासनिक चाबुक चलने के बाद ही क्यों बदला मन?* जब एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ड्राइवर को निलंबित कर दिया, एएसपी को जांच सौंप दी और सीएसपी के अधिकार क्षेत्र में कटौती करते हुए तीन थाने छीन लिए, ठीक उसी के बाद शिकायतकर्ता का मन कैसे बदल गया?

* *सिस्टम का दबाव या 'राजीनामा'?* जनचर्चा है कि हाईवा व ट्रांसपोर्ट कारोबार चलाने वाले किसी आम व्यवसायी के लिए पुलिस अधिकारियों से सीधा वैर मोल लेना आसान नहीं होता। ऐसे में क्या व्यवसायी पर शिकायत वापस लेने का अंदरूनी प्रशासनिक दबाव था, या फिर मामले को रफा-दफा करने के लिए कोई अंदरूनी समझौता हुआ?


*क्या रुक जाएगी जांच?*

आमतौर पर विभागीय मामलों में शिकायत वापस लेने के बाद जांच की दिशा बदल जाती है। हालांकि, सीएसपी के ड्राइवर के सस्पेंशन और थानों के नए कार्य विभाजन के आदेश के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस कप्तान इस मामले की एएसपी द्वारा की जा रही जांच को जारी रखते हैं या शिकायतकर्ता के पत्र के आधार पर फाइल बंद कर दी जाएगी।

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने कटनी पुलिस की साख और कार्रवाई की निष्पक्षता पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

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