एक शिकायत पर तीन थाने छिने, दूसरी शिकायत पर खामोशी! आखिर यह कैसा ‘ईमानदार साहब’ का न्याय?
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस । जिले में खाकी पर लग रहे आरोपों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सवाल अब सिर्फ आरोपों का नहीं, बल्कि पुलिस विभाग की कार्रवाई में कथित दोहरे मापदंड का भी उठ रहा है। एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत सामने आते ही उसके अधीन तीन थाने छीन लिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर एक पुलिस चौकी प्रभारी और पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगने के बाद भी अब तक किसी ठोस कार्रवाई की तस्वीर सामने नहीं आई है।
मामला उस समय सुर्खियों में आया था, जब एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी ने कटनी सीएसपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। हालांकि बाद में शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली। इसके बाद उच्च अधिकारियों ने सीएसपी से तीन थानों का प्रभार वापस ले लिया। यह कार्रवाई पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बनी।(फिर शिकायत मे कार्यवाही के लिए बयान दिए थे )
अब सवाल झींझरी पुलिस चौकी प्रभारी और पुलिसकर्मियों पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। बाद में शिकायत वापस लिए जाने की बात सामने आई। ऐसे में सवाल यह है कि यदि शिकायत वापस लेना ही कार्रवाई का आधार नहीं है, तो फिर दोनों मामलों में अलग-अलग रवैया क्यों?
शिकायत मिली तो जांच में CCTV और कॉल डिटेल क्यों नहीं?
झींझरी चौकी से जुड़े पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जांच की पारदर्शिता को लेकर है। यदि पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, तो मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज, संबंधित मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की बारीकी से जांच क्यों नहीं की गई?
क्या पुलिस विभाग ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि शिकायत वापस लेने के पीछे कोई दबाव था या शिकायतकर्ता ने स्वेच्छा से अपना बयान बदला? यदि शिकायतकर्ता के आरोप निराधार थे तो जांच के बाद उन्हें खारिज किया जा सकता था, लेकिन यदि आरोपों में तथ्य थे तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी संभव थी।
5-7 दिन बाद बयान, तब तक क्या था इंतजार?
पूरे मामले में यह सवाल भी चर्चा में है कि शिकायत के बाद शिकायतकर्ता को कथन के लिए कई दिन का समय क्यों दिया गया। सूत्रों की मानें तो पुलिस महकमे में शायद शिकायत वापस होने का इंतजार किया जा रहा था। हालांकि यह केवल चर्चा है और इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
मामले में कटनी पुलिस कप्तान का कहना है कि शिकायत क्यों वापस ली गई, इसकी जांच की जा रही है। अब निगाहें इसी जांच पर टिकी हैं।
लेकिन जनता का सवाल सीधा है—यदि एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत मात्र से उसके तीन थानों का प्रभार छीना जा सकता है, तो दूसरे मामले में पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगने के बाद निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का पैमाना क्या होगा?
कानून और पुलिस व्यवस्था में सबसे जरूरी चीज भरोसा है। शिकायत सही हो या गलत, उसका निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए। कार्रवाई आरोप देखकर नहीं, तथ्यों और जांच के आधार पर हो—तभी खाकी पर जनता का भरोसा कायम रहेगा।

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