शासकीय जमीन पर मुरुम डालकर बना रहे निजी रास्ता, अनुमति पर सवाल


 

शासकीय जमीन पर मुरुम डालकर बना रहे निजी रास्ता, अनुमति पर सवाल

कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस /आशीष चौधरी । पीर बाबा से कुछ दूरी पर पडुआ स्थित FAIRY Rice फैक्ट्री के बाहर शासकीय भूमि पर मुरुम डालकर कथित रूप से निजी सड़क तैयार किए जाने का मामला सामने आया है। मुख्य मार्ग से फैक्ट्री की ओर जाने वाले हिस्से में मुरुम बिछाकर रास्ते को समतल करने का काम किए जाने से अब सरकारी जमीन के उपयोग और अनुमति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री के बाहर मेन रोड के बाजू में कुछ लोगों द्वारा मुरुम डलवाकर रास्ते का निर्माण कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री परिसर के बाजू से भीतर भवन निर्माण का कार्य चल रहा है और निर्माण सामग्री तथा वाहनों की आवाजाही में परेशानी होने के कारण इस रास्ते को तैयार किया जा रहा है।

हालांकि, यदि संबंधित भूमि वास्तव में शासकीय है और निजी उपयोग के लिए वहां सड़क तैयार की जा रही है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इसके लिए सक्षम विभाग से अनुमति ली गई है? बिना अनुमति सरकारी जमीन पर मुरुम डालकर रास्ता तैयार करना केवल सुविधा का मामला नहीं, बल्कि भूमि के उपयोग और प्रशासनिक स्वीकृति से जुड़ा गंभीर विषय है।


जिम्मेदार विभाग करे मौके की जांच

मामले में राजस्व विभाग द्वारा मौके का सीमांकन कर यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि जिस स्थान पर मुरुम डालकर सड़क बनाई जा रही है, वह भूमि किस मद में दर्ज है और उसका स्वामित्व किसके पास है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि सड़क निर्माण के लिए संबंधित व्यक्ति अथवा संस्था ने कोई अनुमति प्राप्त की है या नहीं।

यदि भूमि शासकीय पाई जाती है और निर्माण बिना अनुमति कराया जा रहा है, तो प्रशासन को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर राजस्व एवं भूमि संबंधी विभागीय जानकारी और संपर्क व्यवस्था उपलब्ध है।


क्या निजी सड़क निर्माण में इस्तेमाल हो रहा मुरुम अवैध उत्खनन से तो नहीं लाया जा रहा? मौके पर कैमरा चालू होते ही मुरुम से भरे ट्रक वहां से निकलते नजर आए। स्थानीय लोगों के अनुसार, मुरुम करहिया के पास स्थित बनर्जी जी की खदान से लाया जा रहा है और खदान के सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं। हालांकि, इसकी वास्तविकता संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।


अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकारी जमीन पर निजी सुविधा के लिए बनाए जा रहे इस रास्ते पर जिम्मेदार अधिकारी कब नजर डालते हैं और जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

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