मिठाई ‘खत्म’, जांच रिपोर्ट ‘हजम’!
त्योहार से पहले नमूने और फोटो सेशन, रिपोर्ट आने तक मिठाई पहुंच जाती है लोगों के पेट में
कटनी। त्योहार आते ही खाद्य सुरक्षा विभाग का अमला मिठाई दुकानों की जांच के लिए सक्रिय हो जाता है। दुकानों पर पहुंचकर मिठाइयों के नमूने लिए जाते हैं और कार्रवाई का त्वरित फोटो सेशन कर उसे मीडिया तक पहुंचाया जाता है। इससे संदेश तो जाता है कि विभाग मिलावट और अमानक खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, लेकिन असली सवाल जांच रिपोर्ट आने की गति को लेकर है।
अक्सर नमूना लिए जाने के बाद जांच रिपोर्ट आने में इतना समय लग जाता है कि तब तक संबंधित दुकान की मिठाई बिककर लोगों के घरों और पेट तक पहुंच चुकी होती है। बाद में यदि नमूना अमानक पाया जाता है तो दुकानदार के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, लेकिन तब तक जिस खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल था, वह उपभोक्ताओं द्वारा खाई जा चुकी होती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल दुकानदार पर कार्रवाई करना है या उपभोक्ताओं को अमानक खाद्य सामग्री से समय रहते बचाना भी?
जबलपुर में डुमना के पास खाद्य पदार्थों की जांच के लिए बड़ी प्रयोगशाला उपलब्ध होने के बावजूद रिपोर्ट में देरी पर विभाग को गंभीरता से विचार करना चाहिए। त्योहारों में जांच रिपोर्ट शीघ्र आए, ताकि अमानक मिठाई बाजार से हटाई जा सके।
उधर, शक्कर के बढ़ते दामों के बीच प्रदेश के एक कद्दावर मंत्री लोगों को मिठाई कम खाने की सलाह दे चुके हैं। अब जनता चाहती है कि मिठाई कम खाने की सलाह के साथ खाद्य विभाग जांच रिपोर्ट आने में भी ‘देरी’ कम करे।
Post a Comment