*कटनी की सीवर लाइन बनी ‘सिरदर्द जनता परेशान- अधिकारी गायब, ठेकेदार बेलगाम!*
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस :शहर क्षेत्र की सीवर लाइन अब लोगों के लिए सिर्फ परेशानी नहीं, पूरा का पूरा नासूर बन चुकी है। लगभग एक साल से ज्यादा बीत गया, लेकिन नगर निगम द्वारा शुरू कराया गया यह निर्माण कार्य आज भी अधूरा पड़ा है। बरसात में कीचड़ से जूझी जनता अब सीजन आते ही धूल, गड्ढों और जाम के प्रकोप से कराह रही है। व्यापारियों की दुकानें वीरान, राहगीर परेशान और बच्चे–बुजुर्ग तक खतरे में-पूरे इलाके की रफ्तार थम गई है।
*लोगों का आरोप बेहद साफ है*
काम नहीं, खेल चल रहा है… वो भी लापरवाही का!”
स्थानीय निवासियों के मुताबिक ठेकेदार की मनमानी चरम पर है। न लेवलिंग सही, न गुणवत्ता की परवाह। धूल के बादल उड़ रहे हैं मानो मिनी रेगिस्तान हो गया हो, सड़क इतनी टूटी कि गाड़ी चलाना नहीं, रोजाना ‘रिस्क’ उठाना पड़ रहा है।
मीडिया कैमरा पहुंचा, तो ठेकेदार ऐसे हरकत में आया जैसे किसी ने नींद से जगा दिया हो!
मामला तब और दिलचस्प हो गया जब मीडिया की टीम मौके पर पहुंची।
जैसे ही कैमरा ऑन हुआ—
जो ठेकेदार दिनों–दिन गायब था, वह अचानक ‘तेज कार्यवाही मोड’ में आ गया!
मशीनें स्टार्ट, मजदूर दौड़ते, पोज़ देकर काम करते… दृश्य देखकर लोग हंस भी रहे थे और गुस्सा भी।
लेकिन जैसे ही कैमरा हटता है,
काम फिर वही—कछुआ चाल… बल्कि उससे भी धीमी।
*जनप्रतिनिधि का दौरा हो जाए तो? 1–2 घंटे में सड़क चमकने लगती है!*
क्षेत्रवासियों का कहना है
जब कोई जनप्रतिनिधि का दौरा होता है तो मानो जादू हो जाता है।”
टूटी सड़क 1–2 घंटे में ऐसे मरम्मत कर दी जाती है जैसे
हवाई जहाज़ की लैंडिंग स्ट्रिप तैयार की जा रही हो!
लेकिन जनप्रतिनिधि के जाने के बाद?
फिर वही धूल, वही गड्ढे, वही बहाना
और जनता को फिर धोखा।
*सबसे बड़ा सवाल - नगर निगम आखिर कर क्या रहा है?*
जब मीडिया पहुंची तो अधिकारी गायब।
न कोई निरीक्षण, न जवाबदेही।
लोगों का आरोप है कि पूरे प्रोजेक्ट को ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दिया गया है और नगर निगम “बस कागज़ों में काम पूरा” दिखाने में माहिर हो चुका है।
*कटनी की जनता का सीधा सवाल*
क्या नगर निगम सो रहा है? या जनता को यूँ ही परेशान रखना उसकी नई नीति है?
*क्षेत्रवासियों ने नगर निगम से तीन मांगें की हैं*
1. काम की तत्काल गति बढ़ाई जाए
2. गुणवत्ता का थर्ड-पार्टी परीक्षण कराया जाए
3. स्पष्ट समयसीमा घोषित की जाए
*कटनी की जनता उम्मीद लगाए बैठी है*
लेकिन सच्चे सवाल से बच नहीं सकता कोई—
“क्या नगर निगम अब भी जागेगा? या सीवर लाइन ऐसे ही नासूर बनकर शहर की नसों में दर्द भरती रहेगी?

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