“टूटी कुर्सियां, जर्जर शेड और बदहाल रास्ते: सुरखी टेंक बदहाली की मिसाल” “सुरखी टेंक बना उपेक्षा का शिकार, बदहाली पर प्रशासन मौन”


 “टूटी कुर्सियां, जर्जर शेड और बदहाल रास्ते: सुरखी टेंक बदहाली की मिसाल”




“सुरखी टेंक बना उपेक्षा का शिकार, बदहाली पर प्रशासन मौन”


कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस:

शहर के समीप स्थित सुरखी टेंक कभी आम नागरिकों के लिए सुकून और सैर-सपाटे का प्रमुख स्थान हुआ करता था। कभी इसके सौंदर्यीकरण और पर्यटन स्थल के रूप में विकास के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन आज वही सुरखी टेंक बदहाली का शिकार होकर अपनी पहचान खोता जा रहा है। वर्तमान हालात किसी से छिपे नहीं हैं। जर्जर शेड, टूटी हुई कुर्सियाँ, झाड़ियों से भरे रास्ते और गड्ढों में तब्दील मार्ग इस स्थल की दुर्दशा की गवाही दे रहे हैं।


बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। गड्ढों में भरा पानी दुर्घटनाओं को खुला न्योता देता है, वहीं झाड़ियों के कारण रास्ता संकरा और असुरक्षित हो गया है। इसके बावजूद लोग मजबूरी में या कुछ समय सुकून पाने की उम्मीद से यहां पहुंचते हैं, पर उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।


गौरतलब है कि पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के कार्यकाल में जनप्रतिनिधियों द्वारा सुरखी टेंक के सौंदर्यीकरण को लेकर बड़े सपने दिखाए गए थे। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बात कही गई थी, लेकिन आज वे सभी घोषणाएँ सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।


सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस बदहाली का जिम्मेदार कौन है? जिला प्रशासन की उदासीनता या जनप्रतिनिधियों की अनदेखी? शहरवासियों की मांग है कि सुरखी टेंक की हालत में शीघ्र सुधार किया जाए, मार्गों की मरम्मत, झाड़ियों की सफाई और बैठने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि यह स्थान फिर से शहरवासियों के लिए उपयोगी बन सके।

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