नगर निगम में आक्रोश, अधिकारियों पर अभद्र टिप्पणी करने वाले के खिलाफ एकजुट हुए कर्मचारी

 नगर निगम में आक्रोश, अधिकारियों पर अभद्र टिप्पणी करने वाले के खिलाफ एकजुट हुए कर्मचारी




कटनी | नगर निगम कटनी के अधिकारियों और कर्मचारियों के सम्मान पर हुए हमले ने पूरे प्रशासनिक अमले को आक्रोशित कर दिया है। शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा की गई अभद्रता, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में निगम कर्मचारी लामबंद हुए।

*क्या है पूरा मामला?*

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 27 दिसंबर को नगर निगम का अतिक्रमण दस्ता जिला और पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर सड़कों पर अव्यवस्थित वाहनों और दुकानों के बाहर रखे सामान को हटाने की कार्रवाई कर रहा था। इसी दौरान श्री श्याम सुंदर पाण्डेय नामक व्यक्ति द्वारा बीच सड़क पर वाहन खड़ा कर रास्ता बाधित किया गया।

जब निगम कर्मियों ने नियमानुसार वाहन हटाने का अनुरोध किया, तो उक्त व्यक्ति ने आपा खो दिया। आरोप है कि उसने न केवल कर्मचारियों को भद्दी गालियां दीं, बल्कि उन्हें मारने के लिए डंडा भी निकाल लिया। इस दौरान आरोपी ने निगमायुक्त के विरुद्ध भी अत्यंत अमर्यादित और अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कर्मचारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

*24 घंटे का अल्टीमेटम*

घटना के विरोध में सोमवार को नगर निगम के समस्त अधिकारी और कर्मचारी एकजुट होकर कोतवाली थाना पहुंचे। कर्मचारी संगठनों ने पुलिस प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर दोषी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की गई, तो समस्त निगम कर्मचारी काम बंद कर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। कर्मचारियों का कहना है कि यह हमला केवल व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की मर्यादा पर है।

*प्रशासनिक सुरक्षा पर उठे सवाल*

निगम अमले ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यदि सरकारी ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों को इसी तरह डराया-धमकाया जाएगा, तो फील्ड पर काम करना असंभव हो जाएगा। यह मामला अब 'कानून बनाम दबंगई' की शक्ल ले चुका है।

फिलहाल, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन कर्मचारियों की सामूहिक मांग है कि जब तक गिरफ्तारी नहीं होती, वे चुप नहीं बैठेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है।

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