“L&T पर आश्रित 300 से ज़्यादा श्रमिक 18 दिन से सड़क पर, सैंकड़ो परिवारों की रोज़ी-रोटी संकट में”


 

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*18 दिन बीते, फिर भी नहीं सुनी गई श्रमिकों की मांगें

L&T का कामकाज पूरी तरह ठप, इलेक्ट्रिक व डीजल लोको शेड प्रभावित**

कटनी।
L&T कंपनी द्वारा निर्धारित समय-सीमा समाप्त हुए पूरे 18 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आज तक श्रमिकों की न्यायोचित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। बीते 18 दिनों से श्रमिक काम बंद हड़ताल पर हैं, वहीं कंपनी के अधिकारी अब तक केवल मौखिक आश्वासन देकर मामले को टालते नजर आ रहे हैं।

शुरुआत में केवल इलेक्ट्रिक लोको शेड के श्रमिक हड़ताल पर थे, लेकिन उनकी मांगों को उचित मानते हुए अब डीजल लोको शेड के सैकड़ों श्रमिक भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं। परिणामस्वरूप L&T का पूरा कार्य ठप पड़ा हुआ है। जगह-जगह मशीनें बीच रास्ते में ही बंद खड़ी हैं और श्रमिकों ने अपने सुरक्षा कवच किट व उपकरण वहीं जस-के-तस छोड़ दिए हैं।

हड़ताल के चलते न केवल इलेक्ट्रिक लोको शेड बल्कि L&T से जुड़े अन्य सभी कार्य भी पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इससे रेलवे के कार्यों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने लगा है।

31 जनवरी की शाम L&T के अधिकारी कार्यालय पहुंचे और श्रमिकों के साथ घंटों बैठक की, लेकिन इसके बावजूद किसी भी मांग पर सहमति नहीं बन सकी और न ही कोई ठोस समाधान निकल पाया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर L&T प्रबंधन कब तक श्रमिकों की मांगों को अनदेखा करता रहेगा और कब तक कंपनी का कार्य इसी तरह बंद रहेगा। श्रमिकों का कहना है कि जब तक उनकी न्यायोचित मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि L&T प्रबंधन कब श्रमिकों की मांगों पर गंभीरता से विचार करता है

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