रील बनाम रियल: सोशल मीडिया चमक के बीच कटनी पुलिस की जमीनी चुनौतियाँ


 रील बनाम रियल: सोशल मीडिया चमक के बीच कटनी पुलिस की जमीनी चुनौतियाँ


कटनी। जिले में लगातार सामने आ रहे हत्या, चोरी, लूट, अपहरण और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों ने पुलिस व्यवस्था की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच एक नया विवाद भी चर्चा में है—पुलिस के कामकाज से ज्यादा उसकी सोशल मीडिया मौजूदगी को लेकर। आरोप लग रहे हैं कि जमीनी स्तर पर अपराध नियंत्रण की बजाय विभाग का एक हिस्सा छवि निर्माण के लिए रील संस्कृति में उलझता जा रहा है।


पिछले कुछ समय से पुलिस की बैठकों, कार्यक्रमों और कार्रवाई से जुड़ी घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में पुलिस की सक्रियता दिखाने की कोशिश की जाती है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वास्तविक समस्याओं के समाधान पर उतना ध्यान नहीं दिखता जितना प्रचार पर।


दिखावे की सक्रियता पर सवाल


विशेष रूप से यातायात पुलिस को लेकर शहर में चर्चाएँ तेज हैं। नागरिकों का आरोप है कि शहर के भीतरी इलाकों की ट्रैफिक व्यवस्था अक्सर अस्त-व्यस्त रहती है, जबकि औपचारिक चेकिंग और अभियान की झलक सोशल मीडिया पर ज्यादा देखने को मिलती है। कुछ पुलिस अधिकारियों के वीडियो भी चर्चा का विषय बने हैं, जिन्हें लोग प्रचार-प्रधान गतिविधि मान रहे हैं।


अफसरों से लेकर निचले अमले तक असर


सोशल मीडिया के दौर में हर संस्था अपनी सकारात्मक छवि पेश करना चाहती है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि जब प्रचार कार्य से बड़ा दिखने लगे, तो भरोसे का संकट पैदा होता है। लोगों का मानना है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल गलत नहीं, लेकिन वह वास्तविक पुलिसिंग के साथ होना चाहिए, उसके विकल्प के रूप में नहीं।


डीआइजी ने दिए जांच के संकेत


मामला उस समय और गरमा गया जब अपराध समीक्षा बैठक के दौरान मीडिया ने पुलिस उप महानिरीक्षक से इस मुद्दे पर सवाल किए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अनुचित गतिविधि सामने आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और नाबालिगों की गुमशुदगी रोकने को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए।


जनता की अपेक्षा: परिणाम दिखें, प्रचार नहीं


शहर के लोगों का कहना है कि पुलिस की वास्तविक उपलब्धि अपराध में कमी, त्वरित कार्रवाई और जनता के भरोसे में दिखाई देनी चाहिए। सोशल मीडिया की चमक तभी सार्थक होगी जब जमीनी स्तर पर भी उतनी ही मजबूती से कानून व्यवस्था कायम नजर आए।


अब देखना यह है कि विभाग इस बहस से क्या सबक लेता है—रील की दुनिया से बाहर निकलकर रियल पुलिसिंग को कितना मजबूत किया जाता है।

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