चाका-पुरेनी और रपटा पेट्रोल पंप के सामने अवैध प्लाटिंग की होड़, जिम्मेदारों की कार्रवाई शून्य


 

चाका-पुरेनी और रपटा पेट्रोल पंप के सामने अवैध प्लाटिंग की होड़, जिम्मेदारों की कार्रवाई शून्य

कटनी / न्यूज़ एमपी एक्सप्रेस / आशीष चौधरी।
कटनी नगर निगम सीमा के भीतर इन दिनों अवैध प्लाटिंग का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में कृषि भूमि पर डस्ट डलवाकर प्लॉट काटे जा रहे हैं और बिना वैध अनुमति के उनकी बिक्री धड़ल्ले से जारी है। तमाम नियम-कायदों और प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

चाका से रपटा पेट्रोल पंप तक बिछा जाल

शहर के चाका, पुरेनी और कुठला थाना क्षेत्र से लेकर रपटा पेट्रोल पंप के सामने की गली तक अवैध प्लाटिंग का जाल फैल चुका है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खेती योग्य जमीन को रातों-रात समतल कर उसे रिहायशी प्लॉट में तब्दील किया जा रहा है। न नगर निगम से अनुमति, न ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की स्वीकृति—फिर भी खुलेआम रजिस्ट्री और सौदेबाजी हो रही है।

अनदेखी या मिलीभगत?

सूत्रों के मुताबिक संबंधित विभागों को इन गतिविधियों की पूरी जानकारी है, इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। इससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि यह महज प्रशासनिक शिथिलता है या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत? शहर में चर्चा है कि प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में यह खेल संचालित हो रहा है, जिससे जिम्मेदार अधिकारी भी मौन साधे हुए हैं।

खरीदारों के लिए खतरे की घंटी

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना वैध नक्शा, सड़क, नाली और मूलभूत सुविधाओं के काटे गए प्लॉट भविष्य में खरीदारों के लिए भारी परेशानी का कारण बन सकते हैं। ऐसे प्लॉट न तो कानूनी सुरक्षा देते हैं और न ही विकास की गारंटी। कई मामलों में विवाद, अतिक्रमण और न्यायालयीन प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है, जिससे आम नागरिक की जीवनभर की जमा-पूंजी दांव पर लग जाती है।

जिम्मेदारों से जवाबदेही की मांग

नगर निगम और राजस्व विभाग की भूमिका पर अब आमजन सवाल उठा रहे हैं। क्या प्रशासन केवल कागजी दिशा-निर्देश जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है? या फिर अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई केवल चुनिंदा मामलों तक सीमित रहेगी?

फिलहाल शहर में अवैध प्लाटिंग का यह खेल बेखौफ जारी है और दिशा-निर्देश हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब सख्ती दिखाता है और नियमों को जमीन पर उतारने की ठोस पहल करता है।

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