*'बिलहरी कंकाल कांड' : जागा प्रशासन; खनिज विभाग की टीम पहुँची, मौके पर मिला अवैध उत्खनन का 'पाताल', लेकिन बिलहरी पुलिस सवालों में*
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस :पुरातात्विक नगरी बिलहरी में मुर्दों की बेकदरी और सरकारी जमीन पर माफिया के तांडव की खबरें लगातार प्रकाशित होने के बाद आखिरकार जिला प्रशासन की नींद टूटी है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार जन-आक्रोश और स्थानीय मिडिया की खबरों के दबाव के आगे झुकते हुए खनिज विभाग ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। लेकिन बिलहरी पुलिस अब भी सवालों में हैं, जिसने अभी तक एफआईआर नहीं दर्ज की है।
गुरुवार को सहायक खनिज अधिकारी पवन कुशवाहा बिलहरी के उस विवादित स्थल पर पहुँचे, जहाँ माफिया द्वारा जेसीबी से पुरखों की कब्रें खोदने का आरोप है। जांच के दौरान अधिकारी ने पाया कि:
* *बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन:* मौके पर सरकारी जमीन को बुरी तरह छलनी किया गया है।
* *पंचनामा कार्रवाई:* अवैध उत्खनन की पुष्टि होने के बाद विभाग ने मौके पर ही पंचनामा तैयार किया है।
* *कलेक्टर कोर्ट में पेश होगा मामला*: खनिज विभाग इस पूरी जांच रिपोर्ट को अब कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत करेगा, जहाँ से माफिया पर भारी जुर्माने और वैधानिक कार्रवाई का फैसला होगा।
*पुलिस की 'पावती' बनाम खनिज विभाग की 'जाँच'*
हैरानी की बात यह है कि जहाँ बिलहरी पुलिस 23 जनवरी 2026 से केवल 'पावती' थमाकर मामले को टाल रही है। न लोगों की भावनाओं की चिंता की, न माफिया द्वारा कानून को ठेंगे पर रखने की चिंता की। वहीं खनिज विभाग की प्राथमिक जांच ने ही अवैध खनन की पुष्टि कर पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठता है कि जब खनिज विभाग को मौके पर अवैध उत्खनन दिख गया, तो एक महीने से पुलिस को वहां 'सब ठीक' क्यों लग रहा था?
*महीने भर की मोहलत: पुलिस ने माफिया को दिया 'समय'?*
ग्रामीणों का आरोप है कि 23 जनवरी को आवेदन देने के बावजूद बिलहरी पुलिस ने मौके पर जाकर न तो जेसीबी जब्त की और न ही खनन को रुकवाया। करीब एक महीने तक पुलिस "जाँच" का बहाना बनाती रही, जबकि इस दौरान भू माफिया बेखौफ होकर पुरखों की कब्रों को खोदता रहा और सरकारी जमीन को छलनी करता रहा। कानून की रखवाली करने वाली पुलिस की यह सुस्ती किसी "मौन समझौते" की ओर इशारा कर रही है।
*BNS की इन धाराओं में दर्ज हो सकता था तत्काल मुकदमा:*
कानूनी जानकारों के अनुसार, ग्रामीणों के 23 जनवरी के आवेदन पर पुलिस चाहती तो तत्काल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर सकती थी:
* *BNS धारा 299*: शवों के अवशेषों (कंकालों) का अपमान करने और कब्रिस्तान में अनधिकार प्रवेश पर।
* *BNS धारा 324:* सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाने पर।
* *BNS धारा 303/305:* शासकीय भूमि से मिट्टी की अवैध चोरी (Theft) करने पर।
* *BNS धारा 329:* आपराधिक अतिचार और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की कोशिश पर।
*ग्रामीणों की मांग: केवल जुर्माना नहीं, जेल भी हो!*
जांच टीम के सामने भी ग्रामीणों ने अपना आक्रोश व्यक्त किया। मनोज कुमार और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि:
"खनिज विभाग अपनी पेनल्टी (जुर्माना) लगाएगा, लेकिन हमारे पूर्वजों के कंकालों का जो अपमान हुआ है, उसका हिसाब कौन देगा? हमें सिर्फ पंचनामा नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ BNS की संगीन धाराओं में FIR और उनकी गिरफ्तारी चाहिए।"
*पंचायत की चुप्पी: सरपंच और सचिव ने क्यों मोड़ा मुंह?*
गाँव की सरकार यानी ग्राम पंचायत बिलहरी भी इस 'पाप' की बराबर की भागीदार नजर आती है।
सरपंच खुशबू राजनारायण सोनी और सचिव गोकर्ण मिश्रा की चुप्पी ने ग्रामीणों के आक्रोश को और भड़का दिया है।
*आरोप:* जब मुक्तिधाम और स्कूल के खेल मैदान जैसी सार्वजनिक संपत्तियों को माफिया छलनी कर रहा था, तब पंचायत प्रतिनिधियों ने इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित क्यों नहीं किया या वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत क्यों नहीं दी? क्या 'गाँव की अस्मत' से ज्यादा जरूरी माफिया का 'रसूख' हो गया है?

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