*सफाई दावों की खुली पोल: 200 कर्मचारियों की 'मानव श्रृंखला' के बाद भी कटाए घाट पर पसरी रही गंदगी*
*नगर निगम की लापरवाही से झूलेलाल समिति को बदलना पड़ा कार्यक्रम, श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश*
कटनी/आशीष चौधरी /न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस :नगर निगम के सफाई दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर शुक्रवार को एक बार फिर सार्वजनिक हो गया। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत लाखों के बजट के दावों की पोल कटाए घाट की बदहाली ने खोल दी है। आलम यह रहा कि जिस घाट पर कल ही 200 कर्मचारियों ने मानव श्रृंखला बनाकर सफाई का ढोल पीटा था, वहां गंदगी के अंबार के कारण एक धार्मिक आयोजन तक संपन्न नहीं हो सका।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार शुक्रवार शाम करीब 4:00 बजे जब झूलेलाल समिति के सदस्य पूजा-अर्चना और दीपदान के लिए कटाए घाट पहुंचे, तो वहां का नजारा देख दंग रह गए। चारों ओर फैली गंदगी और दुर्गंध के कारण घाट पर खड़े होना भी दूभर था। निगम के जल गंगा संवर्धन अभियान दावों के बावजूद घाट की स्थिति जस की तस बनी रही। अंततः, अव्यवस्था से नाराज समिति को अपना कार्यक्रम स्थल बदलकर बजरंग नगर देवरी जाना पड़ा।
*कागजों पर अभियान, धरातल पर शून्य*
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम प्रशासन केवल प्रचार-प्रसार और कागजी खानापूर्ति में व्यस्त है। धार्मिक महत्व के स्थानों पर इस तरह की लापरवाही निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। श्रद्धालुओं ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब विशेष अभियान के दौरान यह स्थिति है, तो आम दिनों में व्यवस्था क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

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