*"सिस्टम की बेशर्मी: 200 परिवार 20 साल से सड़क को तरसे, इधर पूर्व सरपंच के फार्म हाउस तक बिछी ₹8 लाख की 'लाल कालीन' सड़क!"*
कटनी /न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस | कटनी जिले से सिस्टम की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार का एक ऐसा विरोधाभास सामने आया है, जो 'सबका साथ-सबका विकास' के दावों पर सवालिया निशान लगाता है। जहाँ एक ओर 200 परिवार दो दशकों से सड़क की एक-एक गिट्टी के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रसूखदारों के निजी स्वार्थ के लिए सरकारी खजाना पानी की तरह बहाया गया है।
*मराठी टोला: 20 साल का इंतज़ार और चारपाई पर सिस्टम*
बड़वारा जनपद की ग्राम पंचायत इमलिया (मराठी टोला) के हालात आज भी आदिम युग जैसे हैं।
* *समस्या*: गुड़ा मार्ग तक पहुँचने के लिए 3 किलोमीटर की सड़क का अभाव।
* *प्रभाव*: 200 परिवारों का जीवन नरकीय। एंबुलेंस न आने के कारण मरीजों और गर्भवती महिलाओं को आज भी चारपाई (कंधे) पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।
* *प्रशासनिक रवैया*: दो दशकों की मांग के बावजूद फाइलों में कोई हलचल नहीं।
.*लखाखेरा: भ्रष्टाचार का 'शॉर्टकट' और चमचमाती सीसी रोड*
इमलिया के संघर्ष के ठीक उलट, लखाखेरा ग्राम पंचायत में सरकारी बजट की 'उदारता' देखने को मिली है। आरोप है कि रोहनिया मार्ग पर तत्कालीन सरपंच सुशील राय ने अपने निजी रसूख का इस्तेमाल कर अपने फार्म हाउस तक पक्की सीसी रोड बनवा ली।
*विधायक निधि का 'अजीब' गणित*:
इंजीनियर डी.एस. बघेल के अनुसार, इस 800 मीटर की सड़क पर दो बार विधायक निधि खर्च की गई:
* *वर्ष 2016-17*: तत्कालीन विधायक मोती कश्यप के कार्यकाल में ₹5 लाख।
* *वर्ष 2018-19*: तत्कालीन विधायक वसंत सिंह के कार्यकाल में ₹3 लाख।
* सवालिया निशान*: ₹8 लाख की लागत से बनी यह सड़क सरपंच के फार्म हाउस के कुछ मीटर आगे जाकर अचानक खत्म हो जाती है। यदि यह 'किसान हित' में थी, तो इसे आगे के खेतों तक क्यों नहीं ले जाया गया?
*भ्रष्टाचार पर आक्रोश: युवा कांग्रेस ने घेरा तहसील कार्यालय*
बड़वारा में सरकारी धन के दुरुपयोग के खिलाफ युवा कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि जहाँ आम जनता सड़क के अभाव में मरीजों को कंधा देने को मजबूर है, वहीं रसूखदारों के निजी फार्म हाउस तक सरकारी खर्च पर सड़कें बनाई जा रही हैं। नेता राघवेंद्र सिंह ने इसे जनता के हक पर डाका बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों से राशि वसूली की मांग की है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
यह मामला केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं का है। एक ओर 200 परिवारों की जान दांव पर है, और दूसरी ओर एक व्यक्ति विशेष की सुविधा के लिए सरकारी तंत्र नतमस्तक है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'डिजिटल इंडिया' के युग में मराठी टोला को सड़क देता है या भ्रष्टाचार की यह सीसी रोड फाइलों में दबकर रह जाती है।

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