गुणवत्ताहीन सड़क निर्माण पर उठे सवाल, नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली कटघरे में
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस नगर निगम क्षेत्र में इन दिनों विभिन्न वार्डों में सड़क एवं नाली निर्माण कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। इन निर्माण कार्यों पर लाखों रुपये की सार्वजनिक राशि खर्च की जा रही है, जिसका स्रोत आम नागरिकों द्वारा दिया गया कर (टैक्स) है। ऐसे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि कई स्थानों पर निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किए जा रहे हैं। सड़क निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग, तकनीकी मानकों की अनदेखी तथा कार्य में लापरवाही की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इन कार्यों की निगरानी के लिए नगर निगम में इंजीनियरों और अधिकारियों की पूरी व्यवस्था मौजूद है, इसके बावजूद गुणवत्ताहीन निर्माण की शिकायतें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।
लोगों का कहना है कि जब किसी जनप्रतिनिधि द्वारा मौके पर पहुंचकर आपत्ति दर्ज कराई जाती है या मीडिया में मामला उठता है, तब ठेकेदार और संबंधित अमला हरकत में आता है। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी आखिर अपनी भूमिका का निर्वहन किस प्रकार कर रहे हैं।
नगर निगम के अधिकारियों को शासन द्वारा आकर्षक वेतन और विभिन्न सुविधाएं इस उद्देश्य से प्रदान की जाती हैं कि वे निर्माण कार्यों की निगरानी कर जनता के धन का सही उपयोग सुनिश्चित करें। यदि इसके बावजूद ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं और कार्यों की गुणवत्ता संदेह के घेरे में है, तो जिम्मेदारी केवल ठेकेदारों की ही नहीं बल्कि निगरानी तंत्र की भी मानी जानी चाहिए।
शहर के जागरूक नागरिकों का मानना है कि निर्माण कार्यों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए तथा जहां भी मानकों की अनदेखी पाई जाए, वहां संबंधित ठेकेदारों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई होनी चाहिए। आखिरकार जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
"मसुरहा वार्ड और जालपा देवी वार्ड जैसे अनेक उदाहरण नगर निगम क्षेत्र में सामने आ चुके हैं
अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, या फिर सवालों के घेरे में खड़ी यह व्यवस्था यूं ही चलती रहेगी।
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