ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द खरीदी हेतु 2 उपार्जन केंद्रों के स्थल में हुआ परिवर्तन
मूंग एवं उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी 1 जुलाई से प्रारंभ होकर 10 अगस्त 2026 तक संचालित
कटनी /आशीष चौधरी /न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस – राज्य शासन के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के निर्देशानुसार विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी 1 जुलाई से प्रारंभ होकर 10 अगस्त 2026 तक संचालित की जा रही है। कलेक्टर श्री तिवारी के निर्देश पर किसानों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इनमें से 2 उपार्जन केंद्रों के स्थल में आंशिक परिवर्तन किया गया है।
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिले में कुल 7 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए थे।
जारी आदेश के अनुसार ढीमरखेड़ा तहसील में प्राथमिक कृषि साख समिति पान उमरिया द्वारा अब उप कृषि उपज मंडी उमरियापान में खरीदी की जाएगी। वहीं, विजयराघवगढ़ तहसील में प्राथमिक कृषि साख समिति जिवारा द्वारा मारुति वेयरहाउस, ग्राम सतवारा में उपार्जन कार्य किया जाएगा।
शासन द्वारा इस वर्ष एफएक्यू (औसत अच्छी गुणवत्ता) श्रेणी की मूंग का समर्थन मूल्य 8,767 रुपये प्रति क्विंटल तथा उड़द का 7,800 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
*सप्ताह में 5 दिन संचालित होगा उपार्जन*
उपार्जन कार्य सप्ताह में सोमवार से शुक्रवार तक प्रातः 8 बजे से रात्रि 8 बजे तक संचालित किया जाएगा। किसानों को शाम 6 बजे तक तौल पर्ची जारी की जाएगी। विशेष परिस्थितियों में शनिवार को भी तौल कार्य किया जा सकेगा।
*केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश*
कलेक्टर ने केंद्र प्रभारियों को मौसम के अनुरूप सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इनमें वाटरप्रूफ तिरपाल, नमी मापी यंत्र (मॉइस्चर मीटर), बड़े इलेक्ट्रॉनिक कांटे, छननी एवं ग्रेडिंग मशीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। केवल एफएक्यू गुणवत्ता की उपज ही खरीदी जाएगी, जबकि नॉन-एफएक्यू उपज स्वीकार नहीं की जाएगी।
*किसानों के लिए आवश्यक दस्तावेज*
उपज विक्रय हेतु किसानों को आधार कार्ड की प्रति, बैंक पासबुक (आईएफएससी कोड एवं खाता संख्या सहित), समग्र आईडी, किसान पंजीयन पर्ची, खसरा/ऋण पुस्तिका तथा वनाधिकार पट्टाधारी होने की स्थिति में पट्टे की प्रति साथ लाना अनिवार्य है। उपार्जन के उपरांत कंप्यूटर जनित रसीद की एक प्रति संस्था द्वारा सुरक्षित रखी जाएगी, जबकि दूसरी प्रति किसान को प्रदान की जाएगी।

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