जगन्नाथ ट्रस्ट विवाद: अंतिम आदेश में देरी पर आत्मदाह की चेतावनी जांच पूरी, विधिक अभिमत भी मिला, फिर भी आदेश लंबित; कलेक्टर को आत्मदाह का अल्टीमेटम




जगन्नाथ ट्रस्ट विवाद: अंतिम आदेश में देरी पर आत्मदाह की चेतावनी


जांच पूरी, विधिक अभिमत भी मिला, फिर भी आदेश लंबित; कलेक्टर को आत्मदाह का अल्टीमेटम






कटनी/आशीष चौधरी /न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस । जिला प्रशासन की कथित निष्क्रियता और महीनों से न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने से परेशान एक पीड़ित ने कलेक्टर कार्यालय के सामने आत्मदाह करने की आत्मघाती चेतावनी दी है। मामला 'श्री जगन्नाथ ट्रस्ट समिति' के वर्तमान पदाधिकारियों को ब्लैक लिस्टेड और अवैध घोषित करने की मांग से जुड़ा है, जिस पर सभी जांच रिपोर्टें पक्ष में आने के बावजूद अंतिम आदेश जारी नहीं किया जा रहा है।

बाबू वंशस्वरूप वार्ड निवासी आवेदक राजू गुप्ता (पिता स्व. श्री साधूराम गुप्ता) ने 15 जुलाई 2026 को कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर अपनी अंतिम चेतावनी का पत्र सौंपा।


*तीन-तीन सरकारी जांचों में अवैध पाई गई ट्रस्ट समिति*

आवेदक ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि मंदिर की संपत्ति और व्यवस्थाओं को बचाने के लिए उन्होंने तथाकथित समिति के खिलाफ शिकायत की थी। इस मामले में सक्षम अधिकारियों द्वारा दो बार विस्तृत जांच और विधिक परीक्षण कराया गया, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

* *तहसीलदार (नगर) की रिपोर्ट*: जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में कार्यरत तथाकथित 'श्री जगदीश स्वामी मंदिर ट्रस्ट समिति' के नाम से कोई भी वैध पंजीयन अभिलेख मौजूद नहीं है और इसकी वैधानिकता पूरी तरह संदेहास्पद है।

* *एसडीएम कटनी की अनुशंसा:* अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने तहसीलदार की रिपोर्ट से सहमति जताते हुए वर्तमान पदाधिकारियों को ब्लैक लिस्टेड करने और मंदिर का प्रबंधन शासन के अधीन (सरकारी नियंत्रण में) लेने की संस्तुति की है।

* *जिला अभियोजन अधिकारी का मत:* सरकारी वकील/अभियोजन अधिकारी ने भी अपने विधिक अभिमत में समिति को अपंजीकृत और अवैध मानते हुए इसे तत्काल ब्लैक लिस्टेड करना न्यायोचित बताया है।


*"अपर कलेक्टर की मंजूरी के बाद भी क्यों रुकी है फाइल?"*

राजू गुप्ता का आरोप है कि मामले में तहसीलदार, एसडीएम और जिला अभियोजन अधिकारी के स्पष्ट रुख के बाद अपर कलेक्टर महोदय द्वारा भी फाइल को अनुमोदित किया जा चुका है। इसके बावजूद कलेक्टर कार्यालय से अंतिम आदेश पारित नहीं किया जा रहा है।

* "इस प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता से साफ है कि न्यायोचित कार्रवाई को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। इससे मंदिर की बहुमूल्य संपत्ति, धार्मिक व्यवस्था और आम जनता की भावनाओं को लगातार ठेस पहुँच रही है। *- राजू गुप्ता,* पीड़ित आवेदक



लगातार मिल रही तारीखों से तंग आकर आवेदक ने पत्र में लिखा है कि वे मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं। अब उनके पास न्याय पाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले 3 दिनों के भीतर प्रकरण में अंतिम आदेश पारित कर अवैध पदाधिकारियों को ब्लैक लिस्टेड नहीं किया गया, तो वे कलेक्टर कार्यालय के बाहर आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने पर मजबूर होंगे। आवेदक ने साफ लफ्जों में कहा है कि यदि उन्हें कुछ भी होता है, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी जिला कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों की होगी।

इस गंभीर अल्टीमेटम के बाद अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पर क्या त्वरित एक्शन लेता है।

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