कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस /आशीष चौधरी : जिला मुख्यालय के माधवनगर थाना क्षेत्र से माइनिंग और खनिजों के कारोबार में धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग और खुली रंगदारी का एक ऐसा सनसनीखेज महाघोटाला सामने आया है, जिसने पूरे महाकौशल के माइनिंग सिंडिकेट के खौफनाक चेहरे को बेनकाब कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार 'क्वांटम मिनरल्स' फर्म के साथ करीब 4 से 5 करोड़ रुपये की जालसाजी और धोखाधड़ी के इस संगठित खेल में मुख्य सरगना आदिल अहमद और ओमप्रकाश पाठक समेत कुल 9 आरोपियों के खिलाफ माधवनगर पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
इस पूरे गिरोह ने न सिर्फ करोड़ों रुपये की जबरन वसूली की, बल्कि जब पीड़ित ने घुटने टेकने से इनकार कर दिया, तो सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर खदान पर ही ताला लगवा दिया।
इस वारदात का सबसे घिनौना और शातिर पहलू तब सामने आया जब आरोपियों की ब्लैकमेलिंग और रंगदारी की स्क्रिप्ट फेल हो गई। 'इस्माईल एण्ड सन्स' के आदिल अहमद और उसके गुर्गों ने टिकरिया मुड़वारा स्थित 12.679 हेक्टेयर की लेटेराईट एवं बॉक्साइट खदान को शुरू कराने, एनओसी (NOC) दिलाने और आईबीएम (IBM) की कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के नाम पर क्वांटम मिनरल्स से कई किश्तों में करोड़ों रुपये ऐंठे।
लेकिन जैसे ही साल 2025 में खदान सुचारू रूप से चालू हुई, इस सिंडिकेट की नीयत डोल गई। आरोपियों ने पहले नागपुर और फिर कटनी के बंद कमरों में पीड़ित फर्म के मालिक को बुलाकर *75 लाख रुपये की अतिरिक्त रंगदारी मांगी और धमकी दी* कि "पैसा नहीं मिला तो खदान किसी और को बेच देंगे।"
जब क्वांटम मिनरल्स ने इस नाजायज और अवैध वसूली के आगे झुकने से साफ मना कर दिया, तब इस सिंडिकेट ने अपनी चाल बदली। आरोपियों ने सीधे सरकारी सिस्टम को ही हथियार बना लिया:
* *खनिज विभाग में फर्जीवाड़ा:* आरोपियों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत खनिज शाखा कटनी में आवेदन के साथ खुद का झूठा शपथ पत्र (Affidavit) पेश कर दिया।
* *खुद की अटॉर्नी को ही झुठलाया:* जिस खदान को चालू कराने और पावर ऑफ अटॉर्नी लेने के लिए इन्होंने करोड़ों लिए थे, उसी खदान के खिलाफ झूठे तथ्यों का जाल बुनकर खनिज कार्यालय को गुमराह किया।
* *करोड़ों का नुकसान:* इस झूठे हलफनामे के दम पर माइनिंग विभाग से खदान का काम रुकवा दिया गया, जिससे क्वांटम मिनरल्स को सीधे तौर पर 4 से 5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम आर्थिक चपत लगी। मकसद साफ था— खदान बंद होगी, तो पीड़ित आर्थिक रूप से टूटेगा और अंततः 75 लाख की फिरौती देने पर मजबूर हो जाएगा।
एफआईआर के पन्नों से साफ है कि यह महज कोई कागजी हेराफेरी नहीं है, बल्कि पूरी तरह 'अंडरवर्ल्ड स्टाइल' में वसूली का संगठित ताना-बाना था। आरोपियों ने पीड़ित को दबाव में लेने के लिए बकायदा नागपुर में एक गुप्त मीटिंग रखी, जहां सीधे टेबल पर धमकी परोसी गई। इसके बाद कटनी की बैठकों में भी लगातार मानसिक और आर्थिक टॉर्चर किया गया। इसी बीच शातिर आदिल अहमद ने इस खदान का सौदा गुपचुप तरीके से 'विक्ट्री मिनरल्स' के मालिकों के साथ भी कर के पैसे बटोर लिए। यानी एक ही प्रॉपर्टी को अलग-अलग मोहरों को दिखाकर करोड़ों रुपये अंदर करने का यह बड़ा नेक्सस था।
माधवनगर थाना पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह सनसनीखेज मामला टिकरिया मुड़वारा में स्थित 12.679 हेक्टेयर की लेटेराईट और बॉक्साइट खदान को पुनः शुरू कराने के नाम पर की गई बड़ी धोखाधड़ी का है। क्वांटम मिनरल्स फर्म के प्रबंधक संजीव बोहरे की शिकायत पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 0624/2026 दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) और 318(4) (जालसाजी व ठगी) के तहत कायमी की गई है। मामले में आदिल अहमद, हुज्जू, ओम प्रकाश पाठक, नानू मिश्रा, अमन मिश्रा, अलाउद्दीन, सरफराज अहमद, शबनम अहमद और तनवीर खान सहित कुल 9 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक संतोष सिंह इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए गहन विवेचना कर रहे हैं। पुलिस अब सिंडिकेट के बैंक खातों और खनिज विभाग में पेश किए गए संदिग्ध दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।
*माधवनगर पुलिस का कड़ा रुख; अब नपेंगे रसूखदार!*
फरियादी संजीव बोहरे की ठोस शिकायत के बाद हरकत में आई माधवनगर थाना पुलिस ने सभी 9 नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस अब सिंडिकेट के उन तमाम बैंक खातों को खंगाल रही है जिनमें 'लेयरिंग' के जरिए लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए थे। साथ ही, खनिज कार्यालय से उस झूठे शपथ पत्र और आवेदन को भी जब्त किया जा रहा है, जिसके जरिए सरकारी विभाग को गुमराह कर खदान बंद करवाई गई थी।

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