जलभराव रोकने के नाम पर नालियां खुदवाईं, फिर निर्माण के टेंडर बांटे... पहली ही बारिश में खुल गई पूरी पोल
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस /आशीष चौधरी । शहर में जलभराव से राहत दिलाने के दावे करने वाले नगर निगम की कार्यशैली पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। कुछ समय पहले नगर निगम के अधिकारियों ने कई वार्डों में जेसीबी मशीनों से पुरानी नालियां खुदवा दीं। उस दौरान अधिकारियों की निरीक्षण और फोटो खिंचवाने की गतिविधियां भी खूब चर्चा में रहीं। दावा किया गया कि इस कार्रवाई से बरसात में जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी।
आरोप है कि नालियां खोदने के बाद उनके पुनर्निर्माण के लिए टेंडर भी जल्दबाजी में अपने पसंदीदा ठेकेदारों को सौंप दिए गए। करोड़ों रुपये की योजनाओं और बड़े-बड़े दावों के बावजूद पहली ही बारिश ने पूरे सिस्टम की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी।
शहर के कई वार्डों से सड़कों पर बहते नालों का पानी और जलभराव की तस्वीरें सामने आ रही हैं। जिन स्थानों पर पानी निकासी बेहतर होने का दावा किया गया था, वहीं हालात पहले जैसे या उससे भी बदतर दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नालियों का निर्माण गुणवत्ता और योजना के अनुरूप हुआ होता तो पहली बारिश में ही ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए, तो उसका लाभ जनता को क्यों नहीं मिला? क्या नालियां सिर्फ कागजों और फोटो सेशन तक ही सीमित रहीं? यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ है तो जलभराव की समस्या जस की तस क्यों बनी हुई है?
पहली बारिश ने नगर निगम के दावों की पोल खोल दी है। वहीं, अब तक इस मुद्दे पर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। शहरवासी मांग कर रहे हैं कि जल निकासी कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कहीं निर्माण में लापरवाही या अनियमितता पाई जाए तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

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