कटनी पुलिस पर आरोपों का सिलसिला—झूठे आरोप हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं?

 

कटनी पुलिस पर आरोपों का सिलसिला—झूठे आरोप हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं?

कटनी। कटनी पुलिस के अधिकारियों और पुलिस चौकियों को लेकर समय-समय पर गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। कभी CSP स्तर के अधिकारी, कभी झिंझरी चौकी, तो अब नेवार चौकी से जुड़े मामलों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर दिखाई दे रहा है।

सवाल यह है कि यदि पुलिस के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन या झूठे हैं, तो पुलिस ऐसे आरोप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं करती? और यदि आरोपों में प्रथम दृष्टया सच्चाई है, तो फिर निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मामला केवल पुलिस पर लगे आरोपों तक सीमित नहीं है। असली सवाल पुलिस की विश्वसनीयता और कार्रवाई की पारदर्शिता का है। आम नागरिक जब पुलिस पर आरोप लगाता है, तो उसके आरोपों की जांच होना जरूरी है। वहीं, यदि जांच में आरोप झूठे साबित होते हैं, तो कानून के तहत झूठी शिकायत या भ्रामक आरोप लगाने वालों पर कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है।

CSP से जुड़े मामले हों, झिंझरी चौकी का विवाद हो या हालिया निवार चौकी का मामला— हर प्रकरण में जनता के सामने पुलिस का आधिकारिक पक्ष, जांच की स्थिति और कार्रवाई का आधार स्पष्ट होना चाहिए।

क्योंकि यदि आरोप झूठे हैं और पुलिस के पास इसके प्रमाण हैं, तो कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े होते हैं कि आखिर पुलिस चुप क्यों है?

और यदि आरोप सही हैं, तो कार्रवाई नहीं होने से दूसरा सवाल उठता है कि क्या पुलिस महकमे में शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो रही है?

कटनी पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है— आरोप झूठे हैं तो कार्रवाई कब?

और आरोप सही हैं तो जवाबदेही किसकी?

यह मामला किसी एक अधिकारी या एक चौकी का नहीं, बल्कि जनता के पुलिस पर भरोसे का सवाल है।

अब देखना होगा कि कटनी पुलिस इन आरोपों पर क्या आधिकारिक जवाब देती है और जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।

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