भाजपा नेता के सामने अतिक्रमण प्रभारी की बोलती बंद ? नोटिस के बाद भी पन्ना तिराहे का निर्माण नहीं तोड़ पाया निगम अमला
सत्ता की हनक के आगे कार्रवाई ठंडी, नेता जी और पार्षद से सामना होते ही लौटे निगम अधिकारी-कर्मचारी; वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
कटनी/न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस /आशीष कुमार । सत्ता और ताकत के सामने अच्छे-अच्छों की बोलती बंद हो जाती है, फिर करने और कहने के लिए कुछ रह नहीं जाता। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों नगर निगम के अतिक्रमण विभाग में देखने को मिल रहा है। कभी विभाग के कार्यालय में कर्मचारी के साथ मारपीट की घटना सामने आती है तो कभी कार्रवाई करने पहुंचे अमले को धमकाकर या चिल्लाकर वापस लौटने की नौबत आ जाती है। अब पन्ना तिराहे का मामला भी निगम के अतिक्रमण विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की मजबूरी पर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार नगर निगम के अतिक्रमण विभाग की टीम पन्ना तिराहे पर एक निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची थी। बताया जा रहा है कि संबंधित निर्माण को लेकर नगर निगम की ओर से नोटिस भी जारी किया जा चुका था। इसके बाद निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे, लेकिन वहां भाजपा के एक प्रदेश स्तर के नेता जी , एक पार्षद सहित कुछ लोगों से उनका सामना हो गया।
मौके पर भाजपा नेता ने निगम अमले को जमकर खरी-खोटी सुनाई। इसके बाद कार्रवाई करने पहुंचे अतिक्रमण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी बिना निर्माण हटाए ही उलटे पैर लौट आए। अब सवाल यह है कि यदि निगम ने नोटिस जारी किया था और कार्रवाई नियमानुसार होनी थी तो फिर मौके पर पहुंचने के बाद कार्रवाई क्यों रोक दी गई?
वीडियो वायरल, कार्रवाई पर सवाल
पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में मौके पर निगम अमले और भाजपा नेता के बीच हुई बातचीत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। मामला अब केवल एक निर्माण को हटाने या न हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम की कार्रवाई की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
वहीं, मीडिया को दिए गए बयान में अतिक्रमण प्रभारी भाजपा नेता का नाम तक लेने से बचते नजर आए। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निगम अमले को कार्रवाई से पीछे हटने की वजह क्या रही?
आम आदमी पर कार्रवाई, रसूखदारों के सामने क्यों मजबूरी?
नगर निगम का अतिक्रमण विभाग शहर में अतिक्रमण हटाने और नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी निभाता है। लेकिन पन्ना तिराहे की घटना के बाद चर्चा इस बात की है कि क्या निगम की कार्रवाई आम आदमी तक ही सीमित है? क्या राजनीतिक रसूख के सामने निगम के अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई करने से बचते हैं?
यदि निर्माण नियम विरुद्ध था और उसके खिलाफ नोटिस जारी किया गया था तो फिर कार्रवाई होनी चाहिए थी। वहीं यदि निर्माण वैध है तो नोटिस और कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि नगर निगम इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या पन्ना तिराहे के उक्त निर्माण पर दोबारा कार्रवाई की जाती है या मामला राजनीतिक दबाव की चर्चाओं के बीच ठंडे बस्ते में चला जाता है।
वही आप को बता दे उक्त मामले के बाद अतिक्रमण विभाग की ओर से सफाई देते हुए कहा जा रहा है कि उक्त निर्माण उनके (निर्माण कर्ता )द्वारा एक सप्ताह मे तोड़ लिया जावेगा.

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